हल्द्वानी। बेमौसमी ओलावृष्टि से फसल और फलों को होने वाले नुकसान से काश्तकार एंटी हैलनेट का उपयोग कर बचा सकते हैं। एंटी हैलनेट उद्यान विभाग के पास 50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध है।
पिछले कई दिनों से मौसम लगातार अपने रंग बदल रहा है। काश्तकार और उद्यानपतियों को चिंता है कि कहीं ओलावृष्टि न हो जाए। इससे फसलों और फलों के बगीचों को खासा नुकसान होता है। मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे बताते हैं कि इन दिनों फलों में बौर आया हुआ है और बौर के साथ ही फल की सेटिंग भी होने लगी है। ऐसे समय में ओलावृष्टि से फलों को बचाने के लिए विभाग के पास एंटी हैलनेट उपलब्ध है जिसे विभाग 50 फीसदी के अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
क्या है एंटी हैलनेट
प्लास्टिक की डोरी से बुने गए जाल को एंटी हैलनेट कहा जाता है। ओलावृष्टि से फलों को बचाने के लिए संबंधित पेड़ को इस जाल से पूरी तरह से कवर कर लिया जाता है। एंटी हैलनेट से फल के पेड़ के पूरी तरह से ढक देने के बाद ओलावृष्टि से फलों को होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। विभाग का दावा है कि ओलावृष्टि से पेड़ पर लगे फलों को बचाने का यह एक कारगर उपाय है।