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दीपों की जगमग जीवन को रोशन कर दे

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हल्द्वानी। पूरा जिला रोशनी से नहा उठा है। दीपावली त्योहार की रौनक देखते ही बनती है। बुधवार को छोटी मनाई परंपरागत रूप से मनाई गई। बृहस्पतिवार को दीपों का पर्व मनाने की तैयारी है। इस दिन महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों में से महालक्ष्मी भी एक हैं। शाम के समय स्थिर लग्न में कुबेर सहित महालक्ष्मी का पूजन करने से धनधान्य की कमी नहीं होती। महालक्ष्मी के आठ रूप राजलक्ष्मी, भोग लक्ष्मी, योग लक्ष्मी, गृह लक्ष्मी, आध्य लक्ष्मी, ऐश्वर्य लक्ष्मी, गत लक्ष्मी और सत्य लक्ष्मी हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए कनकधारा स्तोत्र, श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए।
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महालक्ष्मी पूजन विशेष लग्न
महालक्ष्मी पर 12 बजे से 3:10, गोधूलि लग्न 4:50 से 6:30 तक और वृष लग्न में रात सात बजे से 9:10 बजे तक पूजन करने का विशेष मुहूर्त है। तंत्र पूजा का मुहूर्त रात 12 बजे से 1:53 बजे तक है।
श्रीकृष्ण का स्वरूप हैं गोवर्धन (अन्नकूट)
ज्योतिषियों के मुताबिक गोवर्धन भगवान श्रीकृष्ण के प्रतीक हैं। पृथ्वी में सभी पहाड़ भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप हैं। इन्हें देवता मानकर इनका पूजन करना चाहिए। इस दिन अन्नकूट पूजन भी करना चाहिए। इस दिन घरों में गन्ने की पौध भी देव मंदिरों में रखी जाती है। कहा जाता है कि इससे घर में अमृत बना रहता है। दरिद्रता निवारण के लिए गन्ने की पौध का पूजन किया जाना चाहिए। इस बार गोवर्धन पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा।
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भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व है यम द्वितीया (भैया दूज)
यम द्वितीया को भैया दूज भी कहा जाता है। यम, शनि और महाराज मनु सूर्य के पुत्र हैं। उनकी पुत्री यमी थी। यमराज अपनी बहन यमी (यमुना) से मिलने इस दिन पृथ्वी पर आए थे। इसीलिए इसे भैया दूज भी कहा जाता है। यमुना ने च्यूड़े (कई दिन पूर्व भिगाए गए धान से बने चावल) से यमराज का स्वागत किया था। इस बार यम द्वितीया (भैया दूज) पर्व शनिवार को मनाया जाएगा।
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