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खराब चावल, अल्मोड़ा की पूर्ति निरीक्षक ने उठाने से किया मना

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हल्द्वानी। स्टेट पूल गोदाम कमलुवागांजा में भंडारित चावल की गुणवत्ता पर उन्हीं के अफसर सवाल उठाने लगे हैं। अल्मोड़ा की पूर्ति निरीक्षक दीपा पांडे ने बृहस्पतिवार को यहां से चावल उठाने से मना किया तो कर्मचारियों के होश उड़ गए। सात गाड़ियां शाम तक खड़ी रहीं। बाद में दूसरे चट्टे से चावल देने के बाद पांच वाहनों को अल्मोड़ा रवाना किया गया।
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अमर उजाला की ओर से चावल की गुणवत्ता में सवाल उठाने के बाद विभाग की ओर से कमलुवागांजा और मंडी स्टेट पूल के गोदाम से चावल के सैंपल लिए गए थे। चावल के 39 सैंपल फेल हो गए थे। इसके बाद अल्मोड़ा डीएसओ की ओर से यहां एक पूर्ति निरीक्षक की तैनाती कर दी गई। बृहस्पतिवार को अल्मोड़ा की पूर्ति निरीक्षक दीपा पांडे ने गोदाम नंबर के-7 के दूसरे चट्टे (स्टैग नंबर-2) से चावल उठाने से मना कर दिया। उन्होंने चावल की गुणवत्ता में सवाल उठाते हुए दूसरे गोदाम से चावल उठान की मांग कर दी। पहले तो अधिकारियों ने चावल देने में आनाकानी की और वही चावल उठाने का दबाव बनाते रहे, लेकिन बाद में दूसरे चट्टे से चावल जारी कर दिया गया।

विभाग के अधिकारियों ने लिए सैंपल
खराब चावल के आरोप के बाद विभागीय अधिकारियों ने चावल के सैंपल लिए। स्टेट वेयर हाउस कॉरपोरेशन और वरिष्ठ खाद्य निरीक्षक ने सैंपल की जांच की। जांच में सैंपल पास हो गए लेकिन प्रथम दृष्टया चावल खराब दिखने के कारण पूर्ति निरीक्षक ने चावल का उठान उस स्टैग से नहीं किया। इससे जांच पर ही सवालिया निशान लगने लगे हैं।
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एक अधिकारी कैसे करे इतने कट्टों की जांच
अल्मोड़ा के डीएसओ ने खराब चावल की सप्लाई न हो इसके लिए कमलुवागांजा में एक पूर्ति निरीक्षक की तैनाती की है, लेकिन एक दिन में अल्मोड़ा जिले को पांच से 12 ट्रक तक चावल जाता है। एक गाड़ी में चावल के 180 कट्टे होते हैं। उधर अल्मोड़ा जिले में एफसीआई के हल्दूचौड़ गोदाम से गेहूं का उठान भी होता है। एक अधिकारी की दो जगह तैनाती है। ऐसे में कैसे चावल की जांच हो रही होगी, एक अधिकारी इतने कट्टों की जांच कैसे कर सकता है, यह भी बड़ा सवाल है।

कमलुवागांजा के गोदाम में टपक रहा है पानी
चावल को लेकर विभाग की लापरवाही खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। चावल की गुणवत्ता में सवाल उठने के बाद भी चावल के रखरखाव में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला की टीम ने कमलुवागांजा गोदाम का जायजा लिया तो वहां पानी से चावल भीगा मिला। पानी चावल में जाने से रोकने के लिए मिट्टी की मेड़ बनाई गई थी।
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