हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल में दिल्ली दर्शन की तर्ज पर शुरू हुई कुमाऊं दर्शन बस सेवा कुप्रबंधन और प्रचार के अभाव में तीन महीने के भीतर ही लड़खड़ा गई है। प्रचार, कुप्रबंधन को कुमाऊं मंडल में लड़खड़ा गई है। हल्द्वानी और नैनीताल से इस सेवा के तहत संचालित बसों के रूटों को लंबा करने, यात्रा में पर्यटन, धार्मिक स्थलों की संख्या बढ़ाने के बाद भी पर्यटक इस सेवा से नहीं जुड़ सके हैं। पर्यटक न मिलने से इस विशेष बस सेवा को साधारण सेवा की तरह चलाया जा रहा है।
परिवहन मंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जा रही कुमाऊं दर्शन बस का सात मई को हल्द्वानी से कुमाऊं के विभिन्न पर्यटन और धार्मिक स्थलों के लिए जोरशोर से शुभारंभ हुआ था लेकिन इस बस सेवा को पर्यटक ही नहीं मिले। हल्द्वानी से यह बस सेवा रविवार, बुधवार, शुक्रवार को सुबह आठ बजे भीमताल, कैंचीधाम, अल्मोड़ा, कौसानी, गरुड़, बैजनाथ के लिए शुरू की गई थी। पर्यटकों को कौसानी में रात्रि विश्राम की सुविधा दी गई थी। जबकि नैनीताल से सुबह 10 बजे सोमवार को यह बस सेवा भवाली, कैंचीधाम, पाताल भुवनेश्वर, गंगोलीहाट तक शुरू की गई। पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की व्यवस्था गंगोलीहाट में की गई थी लेकिन यह महत्वाकांक्षी बस सेवा पर्यटकों को नहीं रिझा सकी। पर्यटकों को रिझाने के लिए कुमाऊं दर्शन बस सेवा के रूटों को लंबा करने के साथ ही इस यात्रा में रामनगर का गर्जिया मंदिर, रानीखेत गोल्ड ग्राउंड, अल्मोड़ा का बिनसर महादेव मंदिर आदि भी शामिल किए गए। इसके बावजूद यह बस सेवा पर्यटकों को आर्कषित करने में नाकाम साबित हो रही है। यह बस सेवा प्रतिदिन 400 किमी संचालित होती हैं, लेकिन दैनिक आय 3000 रुपये से अधिक नहीं बढ़ पा रही है। प्रबंधन को इस बस सेवा से प्रतिदिन औसतन 10 हजार रुपये आय की उम्मीद थी। इस संबंध में मंडलीय प्रबंधक कुशीराम कहते हैं पर्यटन सीजन खत्म होने के कारण कुमाऊं दर्शन बस सेवा पर्याप्त पर्यटक नहीं मिल रहे हैं। इस बस सेवा से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।