हल्द्वानी। नंधौर अभयारण्य के बाघों के बाद अब नंधौर घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले फसल उत्पाद भी ब्रांड बनेंगे। अभयारण्य के करीब डांडा जैसे दूरस्थ गांवों में होने वाले गहत, मड़ुआ जैसे उत्पादों को संग्रहित करने के साथ उसकी पैकिंग करने के बाद ‘नंधौर ब्रांड’ के नाम से बाजार में उतारा है। वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त के अनुसार नंधौर ब्रांड के नाम से उत्पादों की बिक्री के लिए खास शॉप खोलने के साथ ही बिग बाजार समेत अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी आनलाइन शापिंग साइट के माध्यम से बिक्री करने की भी तैयारी है।
नंधौर अभयारण्य बाघ, हाथी के लिए प्रसिद्ध है। इसकी सीमा चंपावत वन प्रभाग तक लगती है। वन विभाग, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) ने जूलोजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) अभयारण्य के आसपास के गांवों के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने के साथ उनके द्वारा तैयार फसलों को उचित मूल्य दिलाने की कोशिश में जुटी है। इसी के तहत नंधौर नाम से एक ब्रांड तैयार किया गया है।
जेडएसएल के प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. हरीश गुलेरिया के अनुसार ग्रामीणों को स्वयं सहायता समूह बनाकर जोड़ा जा रहा है, उनकी ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। अभयारण्य के आसपास के खेतों में जो फसल तैयार होती है, उसमें कीटनाशक, उर्वरक इस्तेमाल नहीं होता है, गुणवत्ता की दृष्टि से यह शानदार है। नंधौर ब्रांड नाम से उत्पादों को बेचने के उसका लाभ किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही चोरगलिया में नंधौर नेचर शाप के नाम एक से आउटलेट भी खोला गया है। इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
बाघ के बाद अब नंधौर के उत्पाद भी बने ‘ब्रांड’
चोरगलिया नेचर शॉप में गहत, मडुआ, उड़द और शहद बिक्री भी हुई शुरू
नंधौर अभयारण्य के आसपास के ग्रामीणों को रोजगार के साथ आर्थिकी सुदृढ़ करने की कोशिश
नंधौर के नाम से ब्रांड तैयार कर आसपास के ग्रामीणों के फसल का उचित मूल्य दिलाने और आर्थिकी मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया गया है। पहले चरण में गहत, मड़ुआ, उड़द से लेकर वाइल्ड शहद को बाजार में उतारा गया है। अन्य फसल उत्पादों के साथ नंधौर अभयारण्य के आसपास के गांवों के ग्रामीणों को जोड़ा जाएगा। साथ ही नेचर शॉप की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। जहां राशन के अलावा अन्य उत्पाद भी मिलेंगे।
- डॉ. पराग मधुकर धकाते पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक