हल्द्वानी। नया शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन माह बीत चुके हैं मगर शिक्षा महकमा सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए एनसीईआरटी पुस्तकें उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं कर सका है। जुलाई में स्कूल खुलते ही प्रदेश के लिए 20 लाख से अधिक पुस्तकें चाहिए।
सरकार ने नये शिक्षा सत्र वर्ष 2018-19 से सरकारी विद्यालयों में पहली से आठवीं के बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें वितरण करने की योजना बंद कर दी है। नि:शुल्क पुस्तकें देने के स्थान पर बच्चों को पुस्तकों के मूल्य के बराबर धनराशि पंजीकृत खाते में भेजने की प्रक्रिया लागू की गई है। सरकारी स्कूलों के पंजीकृत बच्चों के लिए करीब 60 लाख पुस्तकें छपवाई जानी थीं। जनवरी से मई तक कई बार टेंडर हुवे मगर कुछ फाइनल नहीं हो सका। महकमा तो पुस्तकें उपलब्ध नहीं करा सका मगर दूसरे माध्यमों से बाजार में करीब 36 से 40 लाख एनसीईआरटी किताबें पहुंचने पर बच्चों को मिल गईं। इनमें भी राज्य भर में एनसीईआरटी के 24 डीलरों के माध्यम से लगभग 20 लाख पुस्तकें बाजार में उपलब्ध कराई गईं।
अभी तक प्रदेश के सरकारी स्कूलों के लिए नहीं छपी एनसीईआरटी की 20 लाख किताबें
60 लाख किताबों की जरूरत, 40 लाख का ही इंतजाम हुआ
तीसरी से आठवीं तक के कई विषयों की किताबें ही नहीं
हल्द्वानी। तीसरी से आठवीं तक में कई विषयों की एनसीईआरटी पुस्तकें बाजार में नहीं हैं। पुस्तक विक्रेताओं के मुताबिक कक्षा 3,4,5 की लुकिंग एराउंड और मेरी गोल्ड, कक्षा 4 और 5 की आसपास, कक्षा 4,6,7,8 की गणित , कक्षा 7 व 8 की विज्ञान, कक्षा 6,7,8 की हमारे अतीत, कक्षा 7 की राजनीतिक जीवन और हमारा पर्यावरण और कक्षा 6,7,8 की अंग्रेजी विषय की पुस्तकें हैं ही नहीं।
सरकार के फैसले पर भी उठे सवाल
उत्तराखंड में पहली से 12वीं तक सरकारी और निजी सभी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू है, जबकि यूपी में ऐसा नहीं है। यूपी में अब भी आठवीं तक अपना पाठ्यक्रम लागू है। ऐसी स्थिति में यूपी में छपने वाली किताबें यहां कैसे चलेंगी, समझ से परे है।
एनसीईआरटी की पहली और दूसरी कक्षाओं की पुस्तकें छपवाने का आर्डर दिया जा चुका है। तीसरी से आठवीं कक्षा तक किताबों को लेकर महानिदेशक शिक्षा की बैठक में चर्चा होगी। पुस्तकें यूपी से लेने की भी तैयारी है। इसका केबिनेट में फैसला भी हो चुका है।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक, उत्तराखंड