भीमताल (नैनीताल)। नैनीताल जनपद की 52 सहकारी समितियों में अध्यक्ष, सचिव और सदस्यों के 22 जुलाई को होने वाले चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार कुल 52 सहकारी समिति के चुनाव कराने का जिम्मा सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण देहरादून को दिया गया है।
नैनीताल जिले की कुल 53 सहकारी समितियों में से 52 समितियों में अध्यक्ष, सचिव और सदस्यों के लिए चुनाव होगा। जिसमें 22 जुलाई को नामांकन, समिति सदस्यों के चुनाव के बाद 23 जुलाई को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधि चुने जाएंगे। सहकारी समिति के चुनाव में जिन सदस्यों द्वारा बैंक से लोन लेने के बाद भुगतान नहीं किया है वह सदस्य मतदान करने से वंचित रहेंगे। जिले की 52 सहकारी समिति के लिए एक निर्वाचन अधिकारी और एक सहायक अधिकारी की संस्तुति दो-तीन दिन होने के बाद डीएम नाम तय करेंगे।
रानीबाग समिति में नहीं होगा चुनाव
जिले की 53 सहकारी समितियों में से रानीबाग सहकारी समिति निष्क्रिय होने के चलते इस वर्ष यहां चुनाव नहीं कराया जाएगा। रानीबाग की सहकारी समिति को किसी अन्य समिति से जोड़ा जाएगा।
सहकारी समितियों के चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो चुकी है। सप्ताह भर में वोटर लिस्ट बनकर तैयार हो जाएगी। साथ ही निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति भी जल्द की जाएगी।
-बलवंत मनराल, सहकारी समिति अधिकारी
सहकारिता चुनाव में अधिक सदस्य ले पाएंगे भाग
हल्द्वानी। इस बार सहकारिता चुनाव में अधिक सदस्यों के भागीदारी करने की उम्मीद है। इसकी वजह किसानों को आलू बीज के बीमा का क्लेम मिलने से 75 फीसदी से अधिक ऋण की वसूली होने के साथ ही डिफॉल्टरों की संख्या कम रहने की संभावना जताई गई है।
सहकारी समितियों के चुनाव में वही सदस्य भाग ले सकते हैं जो समिति का डिफॉल्टर नहीं होता है। अपर जिला सहकारी अधिकारी अमर सिंह कुंजवाल ने बताया कि जिले में सहकारी समितियों में 31 मार्च तक 69789 सदस्य थे, जबकि निर्वाचन तिथि की घोषणा पूर्व 7 जून 18 तक यह सदस्य संख्या 69855 हो गई है। सात जून तक समितियों में सदस्य बने लोग की निर्वाचन प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। सात जून के बाद समिति की सदस्यता लेने वाले इस बार चुनाव में भाग नहीं ले सकेंगे। सहकारिता सूत्रों के मुताबिक इस बार जिले के 7298 किसानों को आलू बीमा के 9.27 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान हुआ है। किसानों को बीमा राशि का भुगतान होने से सहकारी समितियों में 75 फीसदी से अधिक ऋण की वसूली होने से डिफाल्टरों की संख्या कम होने से चुनाव में अधिक सदस्यों के भाग लेने की संभावना है। ब्यूरो