हल्द्वानी। नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों में कराए जाने वाले गरीब बच्चों के दाखिले पर इस बार संकट के बादल मंडराने लगे हैं। तीन वर्षों से बच्चों की फीस का भुगतान न होने के चलते निजी स्कूलों ने इस बार नि:शुल्क दाखिले देने में अभी से हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
प्रदेश में नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से शिक्षा विभाग द्वारा गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराया जाता है। शुरुआत के तीन वर्षों तक तो शिक्षा विभाग से निजी स्कूलों को बच्चों की फीस का भुगतान होने में कोई दिक्कत नहीं हुई मगर सत्र 15-16 के बाद से भुगतान की समस्या पैदा हो गई। इस तरह अभी तक सत्र 2015-16, सत्र 2016-17, सत्र 2017-18 का बच्चों की फीस का भुगतान विभाग नहीं कर सका है। यूनिवर्सल स्कूल का तो कहना है कि उन्हें तो विभाग से आरटीई का छह वर्ष से भुगतान नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में नये सत्र में गरीब एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के दाखिले कैसे होंगे इसको लेकर विभाग भी चिंतित है, वहीं निजी स्कूल संचालकों ने भी स्पष्ट कह दिया है पिछला भुगतान होने के बाद ही नये सत्र में आरटीई के तहत दाखिले लेंगे।
तीन वर्ष से फीस का भुगतान न होने से दाखिले देने से आनाकानी कर रहे निजी स्कूल संचालक
12 करोड़ 34 लाख 82 हजार 524 रुपये बकाया है जिले के निजी स्कूलों की आरटीई की फीस
8185 बच्चे अध्ययनरत हैं आरटीई के तहत जिले के निजी और पब्लिक स्कूलों में
03 करोड़ 30 लाख 90 हजार 964 रुपये का मिला है बजट शासन से
नये शिक्षा सत्र में दाखिले शुरू करने के संबंध में खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। गरीबी रेखा के दायरे में आने वाले जो भी अभिभावक बच्चे का आरटीई के तहत निजी स्कूल में दाखिला कराना चाहते हैं, वे आवेदन फार्म भरकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
- केके गुप्ता, मुख्य शिक्षा अधिकारी