हल्द्वानी। गांवों को नगर निगम में शामिल किए जाने के मामले में नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार को निशाने पर लिया। कहा कि मनमाने ढंग से परिसीमन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अगर सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो उच्चतम न्यायालय तक लड़ाई लड़ेंगे।
रविवार को ब्लॉक प्रमुख समेत कई ग्राम प्रधानों ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश से उनके आवास पर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि दो वर्ष का कार्यकाल बचा है और निर्वाचित प्रतिनिधियों को सरकार के पास एक आदेश पर अपदस्थ करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। गांवों के निकाय में शामिल होने से ग्राम सभाएं विकास प्राधिकरण के अधीन आ जाएंगी। ग्रामवासियों को गाय की गोशाला बनाने के लिए भी प्राधिकरण से नक्शा पास कराना पड़ेगा। उस पर निगम कूड़ा सफाई, सीवरेज लाइन, पेयजल लाइन बिछाने का काम पूरा नहीं कर पाई है।
ब्लॉक प्रमुख और प्रधानों ने कहा कि मनरेगा आदि के माध्यम से ग्रामवासियों को अच्छा रोजगार मिल जाता है। ग्रामीण इससे वंचित हो जाएंगे। कहा कि शासन ने मात्र कुछ आपत्तियों पर सवाल पूछकर औपचारिकता पूर्ण कर दी। इस संबंध में सरकार ने नेता प्रतिपक्ष को विश्वास में नहीं लिया। बैठक में ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, ग्राम प्रधान मुकुल बल्यूटिया, भागीरथी बिष्ट, सुमन लटवाल, सुरेश बिष्ट, पूरन खनी, त्रिभुवन जोशी, दीपा आर्या आदि थे।