कालाढूंगी (नैनीताल)। उत्तराखंड राज्य बने 17 वर्ष होने को हैं, लेकिन सिर्फ दो मुख्यमंत्री ही कालाढूंगी पहुंच पाए हैं। राज्य का गठन करने वाली भारतीय जनता पार्टी का एक भी मुख्यमंत्री कालाढूंगी नहीं पहुंचा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द होने पर पार्टी ने यह मौका भी गंवा दिया।
वर्ष 2000 में सत्तासीन भाजपा सरकार में प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने नित्यानंद स्वामी यहां नहीं आए। 2002 में हुए आम चुनाव में जीती कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी यहां आए थे। 2007 जीती भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक यहां से दूर रहे। 2012 में जीती कांग्रेस सरकार के मुखिया विजय बहुगुणा यहां नहीं आ सके जबकि ढाई वर्ष बाद मुख्यमंत्री बने हरीश रावत यहां आने वाले दूसरे मुख्यमंत्री बने। नैनीताल विधानसभा से 2012 में अलग परिसीमन कर बनाई गई कालाढूंगी विधानसभा के वोटरों ने भाजपा पर ही विश्वास जताया है, 2007 में भी इस सीट से वोटरों ने भाजपा के खड़क सिंह बोरा को ही जिताकर विधानसभा भेजा था, इसके बाद 2012, 2017 में हुए आम चुनाव में जनता ने भाजपा के बंशीधर भगत को चुनाव जिताकर विधानसभा भेजा। सात वर्ष तक सत्ता में काबिज रहने के बावजूद भाजपा का एक भी मुख्यमंत्री कालाढूंगी नहीं पहुंचा। इस कारण कैडर वोटर वाली माने जाने वाली इस सीट के भाजपा कार्यकर्ताओं में मायूसी है।