हल्द्वानी/रुद्रपुर। कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी अस्पताल में कैदियों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है। उन्हें सामान्य मरीजों के साथ रखा जाता है। इसी का फायदा उठाकर अधिकतर कैदी भागने में सफल हो जाते हैं। एसएसपी डा. सदानंद दाते ने यहां कैदियों के लिए अलग से वार्ड बनाने के संबंध में एसटीएच प्रबंधन और डीआईजी कुमाऊं रेंज को पत्र भेजा है। लेकिन एसटीएच के एमएस एके पांडे ने अलग वार्ड बनाने में असमर्थता जताई है। एमएस का कहना है कि कैदियों के लिए अलग से वार्ड और डॉक्टर की व्यवस्था करना मुश्किल है।
कुमाऊं भर के अस्पतालों से रेफर मरीज एक मात्र सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचते हैं। इन्हीं के बीच कुमाऊं की जेलों में बंद कैदियों का भी उपचार किया जाता है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के अस्पतालों में कैदियों को उपचार के दौरान अलग वार्ड में रखा जाता है। लेकिन सुशीला तिवारी अस्पताल में जनरल वार्ड में ही आम मरीजों के साथ रखा जाता है। कभी वार्ड फुल होने के कारण कैदी की निगरानी में तैनात पुलिस कर्मियों को वार्ड के बाहर ड्यूटी देनी पड़ती है तो रात के समय सिपाहियों को अपने असलहों की सुरक्षा की चिंता रहती है। जनरल वार्ड में सामूहिक बाथरुम आदि होने से भी कैदियों को भागने का मौका मिल जाता है। वर्ष 2017 में ही अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचा धोखाधड़ी का आरोपी प्रकाश कांडपाल भी अस्पताल से फरार होकर मुंबई चला गया था। वहीं बृहस्पतिवार देर रात काशीपुर थाने का अपराधी शमशाद भी तीन पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया। हालांकि दोनों अपराधियों को बाद में पकड़ लिया गया था, लेकिन इस दौरान पुलिस महकमे की खूब फजीहत हुई।
एसटीएच से कैदियों के भागने की घटनाओं को रोकने के लिए एसएसपी डा. सदानंद दाते ने एसटीएच प्रबंधन के साथ ही डीआईजी कुमाऊं रेंज पूरन सिंह रावत को पत्र भेजकर अस्पताल में कैदियों के लिए अलग से वार्ड बनाने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए मना कर दिया है।