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अर्द्ध नगरीय वाले 1045 काश्तकारों को चार गुना मुआवजे का रास्ता साफ

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रुद्रपुर/गदरपुर। किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने दिल्ली में एनएचएआई के चेयरमैन डॉ. एसएस संधू से मुलाकात कर वर्षों से लंबित पड़े एनएच-74 में अधिग्रहीत जमीनों का काश्तकारों का मुआवजा दिलाने एवं रुके हुए कार्यों को जल्द पूरा कराने को लेकर वार्ता की। उन्होंने मुख्य सचिव उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के काश्तकारों की अधिग्रहीत जमीन के अर्द्धनगरीय क्षेत्र में होने के नाते 1045 लोगों को मुआवजा ग्रामीण क्षेत्र के गुणांक 02 (4 गुना) देने को लेकर पत्र भी सौंपा। वार्ता के चेयरमैन ने मुआवजा राशि देने के लिए आरओ एनएचएआई को आदेश दिया।
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करीब पांच सालों से एनएच 74 में जमीनों का अधिग्रहण होने के बाद भी अर्धनगरीय क्षेत्रों के 1045 लोगों को चार गुना मुआवजा नहीं मिल रहा था। यूपी में शहरी क्षेत्रों में दो गुना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना मुआवजा देने का शासनादेश जारी हुआ था। लेकिन उत्तराखंड में इस संबंध में स्पष्ट आदेश नहीं था। विधायक शुक्ला के प्रयासों से कुछ महीने पहले प्रदेश सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। लेकिन यह आदेश जारी होने के बाद भी एनएचएआई के आरओ मुआवजा देने के बजाय आर्बिट्रेशन में चले गए थे। शुक्ला ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तथा मुख्य सचिव से मिलकर पत्राचार कराया था।
मुख्य सचिव ने दोबारा एनएचएआई को पत्र लिखकर उत्तराखंड में अर्धनगरीय क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र ही माने जाने की बात कही थी। बुधवार को इसी पत्र को लेकर विधायक ने एनएचएआई के चेयरमैन डॉ. संधू से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। विधायक ने बताया कि डॉ. संधू ने इस संबंध में आदेश पारित कर दिया है कि अर्धनगरी क्षेत्र की अधिग्रहीत भूमि जो नगरपालिका, नगर निगम, नगर पंचायत क्षेत्र में नहीं है, उसे ग्रामीण क्षेत्र का मानते हुए उसका मुआवजा चार गुना दिया जाए। इस प्रकार वर्षों से लंबित इस मुद्दे पर आर्थिक क्षति झेल रहे 1045 किसानों को करोड़ों रुपये का मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हुआ है। उन्होंने एनएच 74 पर गदरपुर बाईपास, किच्छा में पुलभट्टा के निकट ओवरब्रिज, मेडिसिटी रुद्रपुर सहित अनेक स्थानों पर अधूरा कार्य होने से नागरिकों की परेशानी से डॉ. संधू को अवगत कराया है। इस पर भी डॉ. संधू ने संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को शीघ्र कार्य पूरा करने के कड़े निर्देश दिए। इधर, किच्छा विधायक के साथ एआईसीसी के सदस्य राजेंद्र पाल सिंह भी थे।
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