हल्द्वानी। उच्चशिक्षामंत्री के खिलाफ हाईकोर्ट गए प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद अपर मुख्य सचिव के आग्रह पर केस वापस लेने को राजी हो गए हैं। इतना ही नहीं प्राचार्य ने दो माह पुराने आदेश पर अमल कर कर्णप्रयाग महाविद्यालय में प्राचार्य पद पर ज्वाइन भी कर लिया है।
एमबीपीजी कालेज में गलत दाखिले और छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांशा आर्या के प्रकरण में शासन ने तत्कालीन प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद, उच्चशिक्षा निदेशक, देवीधुरा के प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर को निलंबित किया था। निलंबन के खिलाफ प्राचार्य डॉ. प्रसाद ने भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और शासन ने कोर्ट के आदेश पर छह नवंबर को प्राचार्य डॉ. प्रसाद की बहाली के आदेश जारी किए लेकिन उनके देय वेतन भुगतान आदि रोक दिए। इसके साथ ही एमबीपीजी कॉलेज में तैनाती देने के बजाय उनका तबादला कर्णप्रयाग कॉलेज में प्राचार्य पद पर कर दिया। इसके बाद डॉ. प्रसाद ने दुर्गम क्षेत्र में 18 वर्ष से अधिक सेवाएं देने के बावजूद दोबारा दुर्गम महाविद्यालय में तबादला करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और बाद में इस प्रकरण में उच्चशिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत को भी पक्षकार बनाया।
हाईकोर्ट द्वारा मंत्री को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश देने के बाद से ही शासन दबाव में आ गया था तथा प्राचार्य को किसी तरह मनाने के प्रयास चल रहे थे। इस मामले में शासन को अब कामयाबी मिल गई है। बताते हैं कि अपर मुख्य सचिव डॉ. रणबीर सिंह के आश्वासन पर प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने कोर्ट से मंत्री के खिलाफ केस वापस लेने को सहमति दे दी है। इसके साथ ही दो माह बाद उन्होंने कर्णप्रयाग कॉलेज में भी ज्वाइन कर लिया है। बताते हैं कि प्राचार्य पदों की डीपीसी होने के बाद शासन में इस समय प्राचार्यों की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। इसी में प्राचार्य डॉ. प्रसाद को मनमाफिक स्थान मिलने का शासन से भरोसा मिला है।
मंत्री को पहले कोर्ट में पहुंचाया अब बाहर निकालने को राजी
प्राचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने कर्णप्रयाग कॉलेज किया ज्वाइन
मीमांशा प्रकरण में निलंबन के बाद मंत्री के खिलाफ खोला था मोर्चा
हाईकोर्ट से अब केस वापस लेने को हुए राजी
- शासन के आदेश का पालन करते हुए मैंने कर्णप्रयाग कॉलेज में ज्वाइन कर लिया है। अपर मुख्य सचिव के आग्रह पर उच्चशिक्षा मंत्री के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर केस भी वापस ले रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि अब मेरे साथ अन्याय नहीं न्याय होगा और बेहतर स्थान मिलेगा।
- डॉ. जगदीश प्रसाद, प्राचार्य