हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की दोहरी नीतियों के चलते बीफार्मा के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में फंस गया है। विश्वविद्यालय की ओर से सातवें और आठवें सेमेस्टर की स्पेशल बैक परीक्षा के आवेदन फार्म भरवाए गए और इसकी फीस भी जमा करवाई गई। कुलपति ने ऑर्डिनेंस में इसका प्रावधान न होने का हवाला देकर स्पेशल बैक परीक्षा कराने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। इससे छात्र-छात्राएं काफी परेशान हैं।
कुमाऊं विवि की ओर से भेषज विज्ञान विभाग भीमताल में बीफार्मा पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। चार वर्षीय बीफार्मा पाठ्यक्रम की फीस भी दो लाख रुपये से अधिक है। बीफार्माके सत्र 2014-2018 बैच के कई विद्यार्थियों की सातवें सेमेस्टर (चौथे साल), छठे सेमेस्टर (तीसरे साल) बैक पेपर होने के बाद फिर मामला लटक गया। तीसरे वर्ष में जिस विषय में बैक आई है, उसका पेपर अगले वर्ष 2019 जून में होंगे और सातवें सेमेस्टर में जिस विषय में बैक है उसका पेपर अगले साल दिसंबर में होगा। स्थिति यह है कि कई विद्यार्थियों ने एम फार्मा पाठ्यक्रम में प्रोविजनल प्रवेश भी ले लिया है। एम फ ार्मा के पेपर 15 नवंबर से हैं और बैक के पेपर होने के बाद ही एम फार्मा के पेपर दे सकेंगे। विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए कुमाऊं विवि के परीक्षा नियंत्रक ने सातवें और आठवें सेमेस्टर की स्पेशल बैक परीक्षा के लिए आवेदन फार्म भरने के लिए पोर्टल खोल दिया है। साथ ही फार्म भरने के साथ ही विद्यार्थियों से फीस भी जमा कराई गई। विद्यार्थियों का कहना है कि अब विवि परीक्षा कराने से इंकार कर रहा है। परीक्षा नियंत्रक से भी मिले मगर कुछ नहीं हुआ। अगर स्पेशल बैक परीक्षा नहीं हुई तो उनका एक वर्ष खराब हो जाएगा।
स्पेशल बैक की परीक्षाएं कराने का मामला कुलपति के सामने रखा गया था लेकिन ऑर्डिनेंस में इसका प्रावधान न होने का तर्क देकर उन्होंने स्पेशल बैक परीक्षा की अनुमति नहीं दी। इस कारण स्पेशल बैक की परीक्षा नहीं हो पा रही है। पूर्व में स्पेशल बैक की तीन बार परीक्षाएं होने का तर्क देकर विद्यार्थी स्पेशल बैक कराने की मांग कर रहे हैं।
- प्रो. बीके सिंह, विभागाध्यक्ष भेषज विज्ञान विभाग भीमताल