हल्द्वानी। अधूरी तैयारियों के साथ लागू किया गया ई-वे बिल व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गया है। अब एक जिले से दूसरे जिले में माल भेजने के लिए व्यापारी ई-वे बिल बना रहे हैं लेकिन बिल नहीं बन रहा है। नतीजतन माल भरी गाड़ी खड़ी रह गई।
स्थानीय व्यापारी ने सोमवार को जनरल गुड्स (नमकीन, बिस्कुट, टॉफी, नूडल्स) का सामान एक गाड़ी में भरा। यह माल 50,000 से ज्यादा कीमत का था। सूबे के भीतर भी ई-वे बिल लागू होने पर जब व्यापारी ई-वे बिल जारी कर रहा है तो बिल नहीं बना। व्यापारी के अधिवक्ता ने भी ई-वे बिल बनाने की कोशिश की लेकिन बिल जेनरेट नहीं हुआ। हर बार एचएसएन कोड ऐरर दिखा दे रहा है। इधर इसकी शिकायत राज्य कर अधिकारियों से की गई। अधिकारियों ने पोर्टल से बिल बनाने की कोशिश की लेकिन नहीं बना सके। मामला तकनीकी होने पर अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। अब व्यापारी असमंजस में हैं कि गाड़ी में भरा माल भेजें या नहीं क्योंकि बिना ई-वे बिल के माल भेजने पर चेकिंग में पकड़ी गई गाड़ी जब्त होने, जुर्माने का खतरा रहता है।
एक गाड़ी के लिए ई-वे बिल जेनरेट नहीं हो रहा है, यदि ई-वे बिल नहीं निकले तो कागजी बिल का इंतजाम करें ताकि व्यापारी को माल भेजने में दिक्कत न हो। राज्य कर विभाग को पोर्टल में तकनीकी कमियों में सुधार लाना जरूरी है।
- सुमित गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन।