हल्द्वानी। प्रदेश के आठ राजकीय महाविद्यालयों को शीघ्र अपने भवन मिल जाएंगे। महाविद्यालयों के भवन बनकर तैयार हैं, अब केवल इनके हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उद्घाटन का इंतजार है। वहीं, उच्चशिक्षा विभाग की भी पूरी कोशिश है कि इन महाविद्यालयों को नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले हर हाल में नवनिर्मित भवनों में शिफ्ट कर दिया जाए। मौजूदा समय में ये महाविद्यालय किराये या फिर दूसरे भवनों में चल रहे हैं।
राज्य में उच्चशिक्षा पटरी पर नहीं आ पा रही है। उत्तराखंड राज्य गठन के वक्त राजकीय महाविद्यालयों की संख्या केवल 34 थीं। पिछले 17 वर्षों में सत्तारूढ़ नेताओं द्वारा जनता को लुभाने के लिए राजकीय महाविद्यालय खोलने की ऐसी झड़ी लगाई गई कि महाविद्यालयों की संख्या बढ़कर 118 पर पहुंच गई है। पर्वतीय दूरदराज इलाकों में ऐसे स्थानों पर राजकीय महाविद्यालय खोल दिए गए कि जहां कोई संसाधन तक नहीं थे। नेताओं की घोषणाओं को पूरा करने के लिए शासन और उच्चशिक्षा निदेशालय ने भवन न मिलने पर जहां जगह मिली वहीं राजकीय महाविद्यालय खोलने की औपचारिकता पूरी कर दी। चौखटिया डिग्री कालेज सिंचाई विभाग के भवन में तो कपकोट और कांडा डिग्री कालेज जीआईसी के तीन-चार कमरों में चल रहे हैं। संसाधनों के अभाव के चलते यहां छात्र-छात्राओं की बेहतर शिक्षण की व्यवस्था तक नहीं हो पाई। अब कुमाऊं और गढ़वाल के चार-चार महाविद्यालयों की दशा सुधरने का समय आ गया है। भवन बनकर तैयार हो गए हैं।
डिग्री कालेजों के भवनों का निर्माण कार्य जल्द पूरा हो जाए, ताकि विद्यार्थियों को पठन-पाठन की बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकें। फिलहाल आठ महाविद्यालय नया सत्र शुरू होने से पहले शिफ्ट करने की तैयारी है।
- डा. सविता मोहन, प्रभारी निदेशक उच्चशिक्षा
ये कॉलेज अपने भवनों में होंगे शिफ्ट - छात्र संख्या
दोषापानी (नैनीताल) - 232
चौखुटिया (अल्मोड़ा) - 313
कपकोट (बागेश्वर) - 274
कांडा (बागेश्वर) - 204
नागनाथ पोखरी (चमोली) - 431
नैनबाग (टिहरी) - 430
खत्यूड़ (टिहरी) - 294
त्यूनी (देहरादून) - 231