रानीखेत (अल्मोड़ा)। चौबटिया स्थित उद्यान निदेशालय के दिन जल्द बहुरने की उम्मीद है। पर्वतीय क्षेत्र के औद्यानिकी विकास के लिए आजादी के बाद यहां स्थापित किया गया निदेशालय पिछले दो दशकों से निरंतर रसातल की ओर जा रहा था। अब राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना ली है। वर्तमान में उद्यान निदेशालय में सेब की प्लांटेशन का कार्य चल रहा है। पर्यटन स्थल के लिए प्रशासन पूर्व में यहां सर्वे भी कर चुका है।
1953 में चौबटिया में उद्यान निदेशालय की स्थापना हुई। तब यहां निदेशक सहित अधिकारियों की भारी फौज तैनात थी। यहां के स्वदेशी सेब की खुशबू देश-विदेश में विख्यात थी। राज्य बनने के बाद इसके विकास की उम्मीद थी, लेकिन वह धूमिल होती रही। पिछले कई साल से यहां स्थायी निदेशक की भी तैनाती नहीं की गई। सारा कार्य देहरादून कैंप कार्यालय से संचालित हो रहा है, जिसके चलते कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मुनाफे के चक्कर में 2006 में यहां स्वदेशी सेब के पुराने पेड़ काटकर अमेरिकन सेब के पौधे लगाए गए, लेकिन यह तकनीक भी कारगर साबित नहीं हो सकी। अब विभाग पुन: स्वदेशी सेब की नर्सरी तैयार करने में जुटा है। पिछले तीन साल में यहां 10 हजार नये पेड़ों का प्लांटेशन किया जा चुका है। इसमें सेब की स्वदेशी और विदेशी प्रजातियों के पेड़ शामिल हैं।
चौबटिया गार्डन में सेब का प्लांटेशन किया जा रहा है। हाइडेंटिसिटी एप्पल प्लांटेशन के तहत हिमाचल से भी मंगाकर 500 नये पेड़ लगाए गए हैं। निदेशालय को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है, इसके तहत प्रशासन पूर्व में यहां सर्वे भी कर चुका है। -बीएल वर्मा, उद्यान अधीक्षक, चौबटिया।