हल्द्वानी। बृहस्पतिवार को शहर की सड़कों पर महिला अधिकारों की गूंज सुनाई दी। महिलाओं की इस आवाज में व्यवस्था के प्रति गुस्सा था और खुद के अधिकारों को पाने का संकल्प भी। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए महिलाएं सरकारों को जगाने का प्रयास कर रही थीं। मौका था महिला सम्मेलन के समापन पर निकाली गई रैली का।
वे डरते हैं हमारी निर्भीक आंखों से, जो झांकती हैं सीधे उनकी आंखों में, बोलने की कीमत चुकानी होगी, न बोलने की कीमत भी देनी होगी... कक्ष तुम्हारा सभा तुम्हारी, पक्ष और विपक्ष तुम्हारा, वक्त प्यारे शब्द तुम्हारे, अक्षर और आंकडे़ तुम्हारे... जैसे जोशीले नारों से लिखी गई पट्टियों में सरकारों के उन तमाम दावों का उल्लेख था जो सिर्फ आश्वासन ही बन कर रह गए हैं। गीतों और नारों में शराब नीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, खनन और व्यापार पर तंज भी थे। दो नहरिया स्थित बारात घर में आयोजित महिला संगठनों के दूसरे चरण की बैठक समाप्त होने के बाद रैली का आयोजन किया गया था। दो नहरिया से तहसील कार्यालय तक महिलाओं के इस पैदल मार्च ने हर किसी का ध्यान खींचा। बाद में तहसीलदार को विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया।