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गिरधारी की पत्नी से रिश्तेदारी नहीं, विश्वास में धोखा खाया

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हल्द्वानी। उत्तराखंड की महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी पर किडनी निकलवाने का आरोप लगाने वाले नरेश चंद्र गंगवार ने कहा कि उसे धोखा दिया गया है। उसे बैजयंती माला का रिश्तेदार बताया जा रहा है। यह सरासर झूठ है। सच तो यह है कि गंगवार और साहू में शादी ही नहीं होती। अब फंसने के बाद मंत्री के पति का परिवार गलत बयानीबाजी कर रहा है।
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एसएसपी जन्मेजय खंडूरी को तहरीर देने के बाद नरेश चंद्र गंगवार हल्द्वानी में रह रहा है। उसने अमर उजाला को बताया कि उसके पास गिरधारीलाल साहू ने अपने करीबी सत्येंद्र के मोबाइल से चार अक्तूबर को कॉल की थी। गिरधारी लाल ने कहा कि बरेली रोड स्थित आइसक्रीम फैक्ट्री में गबन हो गया है। अब उसे फैक्ट्री का काम जाकर देखना होगा। पैसा मांगने पर वह गलत ढंग से बात करने लगा। छह अक्तूबर को उसने नौकरी छोड़ दी। नरेश का कहना है कि श्रीलंका में किडनी निकलने के बाद उसका स्वास्थ्य लगातार खराब होने लगा। श्रीलंका के कोलंबो में गिरधारी ने मकान और बच्चों की पढ़ाई परिवार का खर्च देने का भरोसा दिया था। दो महीने वह अपने घर जशनपुर शेरगढ़ में रहा। इस बीच गिरधारी ने दो महीने का वेतन भी नहीं दिया। आश्वासन के भरोसे वह काम करता रहा। आरटीओ रोड स्थित फार्म हाउस पर उसे बेलबाबा के पास पाइन सिटी के काम को देखने की जिम्मेदारी दी गई। पाइन सिटी में फ्लैट बन रहा था। पैसा नहीं मिलने पर बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही थी। उसकी बड़ी बेटी प्रीती बीबीए कर चुकी है। बेटा शुभम गंगवार बीबीए कर रहा है और छोटा बेटा सत्यम गंगवार हाईस्कूल में पढ़ रहा है। नरेश के अनुसार मंत्री के पति द्वारा फूटी कौड़ी नहीं मिलने पर उसने पुलिस से शिकायत करने का निर्णय लिया। इसके पहले गिरधारी कहता था कि शिकायत करने से कुछ नहीं होगा। कांग्रेस की सरकार में उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ेगा। खुद वह कांग्रेस के बड़े नेताओं के साथ रहता था।

पांच साल पहले बांया पैर हुआ खराब
नरेश चंद्र ने बताया कि 2012 में वह बाइक द्वारा बहेड़ी से शेरगढ़ जा रहा था। इस बीच नीलगाय रास्ते में आने से बाइक अनियंत्रित हो गई और उसका बांया पैर टूटकर अलग हो गया था। किसी प्रकार रिश्तेदारी और करीबियों ने उसका इलाज कराया। अभी भी वह एक पैर में जूता पहनता हैं।
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श्रीलंका भेजेंगे जांच टीम
एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने बताया कि विवेचक को श्रीलंका भेजने की रणनीति बनाई जा रही है। इस मामले में सारे तथ्यों की जांच के लिए कोतवाल केआर पांडे को नियुक्त किया है। कोतवाल का कहना है कि वह भुक्तभोगी का बयान लेने के लिए सोमवार को उसे बुलाएंगे। प्रार्थनापत्र के कुछ बिंदुओं की सत्यता के बारे में पुलिस प्रमाण भी लेगी।


नरेश चंद्र ने 11 सदस्यीय टीम के सामने किडनी देने से पहले दस्तखत किए थे। उसने खुद को रिश्तेदार बताया था। वह आरटीओ रोड स्थित फार्म हाउस पर रहा ही नहीं है। नरेश चंद्र नौकर का काम नहीं करता था। तीन साल बाद यह सवाल उठाना कुछ लोगों की साजिश का हिस्सा हो सकता है। आखिर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो तक कोई दबाव बनाकर किसी को नहीं ले जा सकता है। रास्ते में या भारत में आने पर वह अपनी जुबान खोल सकता था। अभी तक नरेश किन कारणों से चुप रहा है और अब झूठे बयान देने से हिचक नहीं रहा है यह विचारणीय प्रश्न है। - गिरधारीलाल साहू
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