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मंत्रियों और विधायकों का दबाव दरकिनार

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हल्द्वानी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का रुख कुछ सख्त हुआ तो मंत्रियों और विधायकों का दबाव भी दरकिनार हो गया। बुधवार को तराई की मिलों ने साफ चावल की आपूर्ति की। अभी तक ये मिलें खराब चावल के बदले सही चावल देने में आनाकानी कर रहीं थीं। माना जा रहा था कि मिलों से चावल की आपूर्ति न होने देने के लिए तराई के ही मंत्रियों और विधायकों की ओर से विभाग पर दबाव बनाया जा रहा था। अमर उजाला में यह खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को खाद्य विभाग के अधिकारियों ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि मामला सार्वजनिक हो गया है और उनसे जवाब देते नहीं बनेगा।
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बुधवार को तराई की दो मिलों ने कमलुआगांजा स्थित स्टेट पूल के गोदाम में करीब 300 क्विंटल सही चावल की आपूर्ति की। इन चावलों के सैंपल लिए गए और बताया गया कि सैंपल पास होने के बाद ही माल उतारा गया। खराब चावल की आपूर्ति का मामला सामने आने के बाद मिल मालिकों को खराब चावल ले जाकर साफ चावल गोदाम में लाने को कहा गया था। हल्द्वानी की चावल मिलों से साफ चावल की आपूर्ति शुरू हो गई थी, लेकिन तराई की मिलों से मंगलवार तक चावल नहीं भेजा गया। सूत्रों के मुताबिक तराई के ही मंत्रियों की ओर से मिल मालिकों पर दबाव न बनाने के लिए विभाग के अधिकारियों से कहा जा रहा था। सत्ता पक्ष के ही दो विधायक भी इस जोर आजमाइश में लगे हुए थे।
अमर उजाला ने तराई की मिलों की ओर से चावल की आपूर्ति न होने का सवाल उठाया तो विभाग भी हरकत में आया। एक अधिकारी के मुताबिक मिल मालिकों को साफ कहा गया कि मामला खुलकर सामने आ गया है और ऐसे में उन पर भी आंच आ सकती है। मिल मालिकों को कहा गया कि उन्हें चावल की आपूर्ति करनी होगी। विभाग के अधिकारियों के बदले रुख का ही परिणाम रहा कि बुधवार को तराई की दो मिलों से तीन सौ क्विंटल साफ चावल स्टेट पूल के गोदाम में उतारा गया। मंडी स्थित स्टेट पूल के गोदाम में भी हल्द्वानी की चावल मिलों की ओर से 450 क्विंटल चावल भेजा गया। इस तरह बुधवार को स्टेट पूल में कुल मिलाकर 750 क्विंटल साफ चावल की आपूर्ति की गई। बताया गया कि सैंपल पास होने के बाद ही चावल गोदाम में उतारा गया।
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