उत्तराखंड के खनन कारोबार में उत्तर प्रदेश के माफिया की आहट सुनाई देने लगी है। प्रस्तावित नई खनन नीति के ड्राफ्ट पर भी इस माफिया का असर बताया जा रहा है। यह ड्राफ्ट अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाना है।
सूत्रों के मुताबिक पोंटी चड्ढा मर्डर के बाद खराब हुई खनन की डील यूपी के ही एक अन्य माफिया से की जा रही है। इस माफिया ने यूपी में मायावती सरकार के रहते खनन नीति अपने मुताबिक तैयार करवाई थी। अब इसने उत्तराखंड में भी दखल दे दी है। बताया जा रहा है कि उच्च स्तर पर डील होने के बाद इस माफिया को ध्यान में रखकर को नई खनन नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सहारनपुर के एक राजनेता के तौर पर पहचान रखने वाले इस माफिया के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम, कुमाऊं मंडल विकास निगम और वन विकास निगम से बाकायदा खनन के लॉट्स वापस लिए गए हैं। जीएमवीएन ने खुद से चिह्नित 250 लॉट्स में से 95 लॉट्स सरकार को वापस किए हैं। इसी तरह केएमवीएन और वन विकास निगम ने भी अपने-अपने लॉट्स वापस किए हैं।
राज्य की खनन नीति अब तक क्रेशर के साथ जोड़कर राज्य के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने के लिए थी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक अब सिर्फ राजस्व कमाना ही एकमात्र उद्देश्य रखते हुए नीति का मसौदा बनाया जा रहा है। इस नीति से देहरादून, हरिद्वार के साथ ही पर्वतीय क्षेत्र में खनन के काफी बड़े लाट्स हैं, जिन पर इस माफिया की नजर है। कुमाऊं में गौला नदी में भी खनन खुलने की आहट के बाद यूपी के खनन कारोबारी उत्तराखंड की ओर रुख कर रहे हैं।