जीते-जीते तो उत्तराखंड सरकार लोगों की मदद को समय पर नहीं पंहुच पाई, लेकिन अब मरने के बाद गंगा में बह कर आ रहे शवों को भी समय रहते नहीं उठा रही है। उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश की सीमा में गंगा किनारे शव बिखरे हुए हैं, लेकिन इन्हें उठाने के लिए प्रशासन के नुमाइंदे नहीं पंहुच रहे हैं।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर गंगा किनारे एक नर कंकाल दो दिन से पड़ा हुआ है। सूचना देने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने कंकाल को वहां से नहीं हटाया है। आशंका जताई जा रही है कि यह कंकाल पहाड़ में आई जलप्रलय में लापता हुए किसी व्यक्ति का हो सकता है।
ग्रामीणों ने गंगा में बहते देखे नर कंकाल
ग्रामीणों की बातों पर यकीन करें तो उन्होंने दो-तीन ऐसे कंकालों को गंगा में बहते देखा है। बृहस्पतिवार की देर शाम क्षेत्र में गंगा के किनारे दो से तीन नर कंकाल पड़े होने की चर्चा थी। ‘अमर उजाला’ प्रतिनिधि ने जब शुक्रवार की सुबह उत्तराखंड के कलसिया और उत्तर प्रदेश के रामसूवाला के नजदीक गंगा किनारे पहुंचकर इस चर्चा की पुष्टि करनी चाही तो बात सच साबित हुई।
यहां गंगा के किनारे एक नर कंकाल पड़ा दिखा। मामले की सूचना तहसील अधिकारियों को देने के बावजूद नर कंकाल को देखने और उठाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। आसपास के खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों की मानें तो बृहस्पतिवार को उन्होंने इसी तरह के नर कंकालों को गंगा में बहते हुए देखा है।
कैसे होगी पहचान
मालूम हो कि 16 और 17 जून को केदारघाटी में आई जल प्रलय के बाद सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग लापता हैं। आशंका जताई जा रही है ये लोग जल प्रलय की भेंट चढ़ गए और नदियों में समा गए। एक तरफ सरकार लापता लोगों के शव मिलने के बाद डीएनए सुरक्षित रखने की बात कर रही है दूसरी तरफ गंगा के किनारे पड़े शव को उठाया तक नहीं गया है।