छात्रवृत्ति घोटाले का खेल उत्तराखंड में नहीं बल्कि देश के करीब 15 राज्यों में धड़ल्ले से जारी है। बिना एडमीशन के छात्र-छात्राओं की फर्जी सूची जारी कर छात्रवृत्ति के नाम पर सरकारी धन हड़पा जा रहा है।
विजिलेंस की जांच में कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य आए है, जिसमें पूरे नेटवर्क से पर्दा उठने की उम्मीद है। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों की सांठगांठ से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। बिहार में भी हाल में ऐसा ही एक फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है, जिसमें उत्तराखंड के चार कॉलेजों का नाम सामने आया है।
नैनीताल और उत्तरकाशी में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के अधिकारियों द्वारा फर्जी छात्र-छात्राओं की सूची सौंपकर सरकारी रकम हड़पने का बृहस्पतिवार को खुलासा हुआ है। जालसाजी से छात्र-छात्राओं को बिना एडमीशन कराए उन्हें पात्र दिखाकर छात्रवृत्ति वसूली जा रही थी।
इन जालसाजों की बैंकों में गहरी सांठगांठ है, जिसके जरिए यह लोग स्टूडेंटों के खाते भी खुलवा लेते हैं। सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत 15 राज्यों में छात्रवृत्ति का यह गोरखधंधा चल रहा है। हाल ही में बिहार में छात्रवृत्ति घोटाला पकड़ में आ चुका है।
राज्य के जिन चार कालेजों के नाम सामने आए थे, इनमें से तीन कालेज तो अस्तित्व में ही नहीं पाए गए, जबकि चौथे के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। अब तक सबसे बड़ा छात्रवृत्ति घोटाला मुजफ्फरनगर में पकड़ा गया है। करोड़ों की इस हेराफेरी की पोल खोलने वाले तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई थी।
कई गोलियां लगने के बाद वो बच गए थे। विजिलेंस के डायरेक्टर अशोक कुमार की माने तो अभी इस खेल का पूरा सच अभी सामने आना बाकी है। पूरे मामले में तह तक जाकर कार्रवाई की जाएगी।
राज्यों को भेजा जा रहा अलर्ट
उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाला पकड़े जाने के बाद देश के अन्य राज्यों को अलर्ट भेजा जा रहा है, क्याेंकि 15 के करीब राज्यों में उनका नेटवर्क काम कर रहा है। कहा जा रहा है कि वो भी अपने क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं की सूची का सत्यापन करा ले, ताकि सरकारी धन की लूट को बचाया जा सके।
- अशोक कुमार, डायरेक्टर विजिलेंस