अब रहम करो भगवान! अब तो सबकुछ लूट गया है, जो बचा है उसे तो बचे रहने दो। अब कोई अनर्थ न करना। यह प्रार्थना रुद्रप्रयाग जिले में फंसे तीर्थयात्री और स्थानीय लोग करते नजर आ रहे हैं।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
इस विनती की जरूरत तब और शिद्दत से महसूस हुई जब रविवार देर रात और सोमवार सुबह से ही रुद्रप्रयाग जिले में जमकर बारिश होने लगी। मैंने भी भगवान से यही प्रार्थना की। लेकिन इसका असर कुछ खास होता नजर नहीं आया। सोमवार तड़के 3.45 बजे ही मेरे एक मित्र पंकज नेगी का फोन आया कि बहुत तेज बारिश हो रही है मुझे डर लग रहा है।
श्रद्धालु भी अब धैर्य खोने लगे
उसकी कांपती आवाज सुनकर मैं भी दहशत में आ गया। मुझे लगने लगा कि भक्तों की परीक्षा हर कदम पर लेने की अब भगवान ने ठान ली है। तभी तो विभिन्न स्थानों पर फंसे लोग कुछ कदम दूर पहुंचते हैं, तो सामने एक नई मुसीबत इंतजार कर रही होती है। आपदा के कारण कई दिनों से विभिन्न स्थानों पर फंसे श्रद्धालु भी अब धैर्य खोने लगे हैं।
कोटेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम से मिलने मैं सोमवार सुबह आठ बजे पहुंचे। इस दैवी आपदा पर वे बोले कि कुछ लोगों द्वारा मर्यादाओं का उल्लंघन करने का परिणाम सभी को भुगतना पड़ रहा है।
कोटेश्वर महादेव गुफा जाते हुए देखता हूं कि बाढ़ में रास्ता बह गया। लेकिन उसके पास स्थित शनिदेव की मूर्ति और सारे चिमटे पहले की तरह ही मौजूद हैं। मेरे अनुसार यह भगवान का चमत्कार ही हैं।
इसके बाद मैं बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोहबगड़ की ओर चल पड़ता हूं। रैतोली बाइपास पर पुलिस लोगों को आगे नहीं जाने दे रही है। पता चला कि रुद्रप्रयाग से करीब सात किमी दूर नरकोटा में जाम लगा है। किसी तरह मैं नरकोटा से पांच किमी आगे खांकरा पुल पहुंचता हूं।
लोग परेशान हैं
वहां खड़े कोतवाल बीएस भाकुनी सहित पुलिस कर्मी लोगों को मयाली-घनसाली मोटर मार्ग से जाने को कह रहे हैं। लोग परेशान हैं। खांकरा पुल पर श्रीनगर की ओर लगभग 30 मीटर सड़क का आधा हिस्सा चित्रमति गदेरे में बह गया है।
राजस्व उप निरीक्षक जेपी गैरोला बताते हैं कि रात बहुत तेज बारिश हुई। जिससे गदेरे का पानी चढ़ गया। रात दो बजे गदेरे के किनारे घरों के लोगों को दूसरी जगह ले जाया गया। बाढ़ से दो दुकान ध्वस्त हो गई हैं और कई दुकानें खतरे की जद में आ गईं हैं।
सांप भी दिखाई दिए
यहीं पर मेरी मुलाकात श्रीनगर की ओर से आ रहे लोगों से होती है। वह बताते हैं कि डुंगरीपंथ-खेड़ाखाल मोटर मार्ग पर छांतीखाल से खांकरा तक तीन किमी पैदल चलकर आए हैं। रास्ते में सांप भी दिखाई दिए। पूरे रास्ते पर झाड़ियां थीं। आगे बढ़ने पर हमें सिरोहबगड़ से दो किमी पहले वाहन छोड़कर पैदल जाना पड़ता है।
सिरोहबगड़ में पहुंचते ही दिखता है कि लगभग 150 मीटर हिस्सा बिल्कुल कट गया है। बीआरओ की मशीन दोनों ओर काम पर लगी हैं। यहां मौजूद बीआरओ का मजदूर बताता है कि रविवार शाम पांच बजे से सड़क बाधित है।
सहारा भी छिन गया
पहले लोग सिरोहबगड़ के बाधित होने पर मल्यासू और पपड़ासू झूला पुल से नदी पार कर पांच किमी का सफर तय कर आवाजाही करते थे। इस बार दोनों पुलों के बाढ़ में बहने से वह सहारा भी छिन गया। वापसी में हमें खांकरा पुल पर ग्राम प्रधान खांकरा नरेंद्र ममंगाई मिलते हैं।
वह बताते हैं कि तेज बारिश के कारण गहड़खाल, कांडई, स्यूणी गदेरे, कालोगाढ़, मुस्या गदेरा, फतेहपुर, खांकरा पुल सहित कई स्थानों पर मार्ग बाधित हो गया है। जिससे रुद्रप्रयाग-श्रीनगर के मध्य यातायात संपर्क कट गया है। क्षेत्र में पेयजल योजनाएं और सिंचाई गूल बह गई हैं।
वाहनों की कतार लग गई थी
रैतोली बाइपास और गुलाबराय मैदान में भी मध्याह्न 12 बजे तक वाहनों की कतार लग गई थी। लोग मार्ग खुलने का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस बैरियर पर मुझे हेमकुंड साहिब से किसी तरह यहां पहुंचे गुरुदीप सिंह मिलते हैं। वह 14 जून से पहाड़ में फंसे हैं।
वह बताते हैं कि गोविंदघाट में उन्हें नदी पार हेलीकाप्टर से कराई गई। इसके बाद तीन किमी पैदल चलने के बाद आर्मी के ट्रक में सवार होकर वह किसी तरह जोशीमठ पहुंचे। अब जोशीमठ से चले तो रुद्रप्रयाग में फंस गए हैं।
यहां से कहा जा रहा है कि घनसाली के रास्ते निकलो। समझ में नहीं आ रहा है कि किस रास्ते अपने घर तक पहुंचे। हम लोग पहाड़ में ही फंसकर रह गए हैं।