जंगल में फेंकी एक्सपायरी डेट की दवाएं।
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भाबर के मालन नदी के किनारे के जंगल सिडकुल की फैक्ट्रियों का कूड़ा डंपिंग जोन बनकर रह गया है। स्टील प्लांटों के स्लैग पर प्रशासन के शिकंजे के बाद अब सिडकुल की फैक्ट्रियों से इस इलाके में एक्सपायरी डेट की दवाइयां और अन्य प्लास्टिक कचरा बड़े पैमाने पर फेंका जा रहा है जिससे इस क्षेत्र में वन्यजीवों और मवेशियों की जान को खतरा पैदा हो गया है।
नदी किनारे के जंगल में खुले में कांच और अन्य पैकिंग कचरे के ढेर बढ़ते जा रहे हैं। जिस पर क्षेत्रीय ग्रामीणों ने भी एतराज जताया है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से फैक्ट्रियों के कचरे को नदी किनारे और जंगल में डालने से रोकने की मांग की है। ग्राम प्रधान जशोधरपुर शैलेश शैलेंद्र डबराल, उमेश रावत, राकेश ध्यानी, मनोज सौंद, नवीन शर्मा ने बताया कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं, वहीं भाबर में सिडकुल की फैक्ट्रियां सार्वजनिक स्थानों, नदियों और जंगलों में कूड़ा डंप कर स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से फैक्ट्रियों के कचरे के निस्तारण की उचित व्यवस्था करने और मालन खाम क्षेत्र में कूड़ा डंपिंग पर अंकुश लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द ही मालन क्षेत्र में कचरा फेंकना बंद नहीं किया गया तो पूरा इलाका कूड़ा डंपिंग जोन बन जाएगा। सिडकुल का भी फैक्ट्री वालों पर कोई अंकुश नहीं रह गया है।
ग्रामीणों के अनुसार मालन के जंगल में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरे के साथ ही कांच, एक्सपायरी डेट की दवाइयां खुले में फेंकी जा रही है, जबकि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वन्यजीव विचरण करते हैं। दिन में यहां ग्रामीणों के मवेशी जंगल में चरने के लिए जाते हैं। सिडकुल के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक केएन नौटियाल का कहना है कि उनके संज्ञान में मामला नहीं है। इसके खिलाफ कदम उठाए जाएंगे।
मालन नदी क्षेत्र आरक्षित वन भूमि के अंतर्गत आता है। यहां किसी भी तरह का कचरा डालना गैरकानूनी है। मामले को दिखवाया जा रहा है जिस फैक्ट्री अथवा प्रतिष्ठान का कचरा पाया गया, उसके खिलाफ मुकदमा दायर किया जाएगा।
- एनएम त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग।