यमकेश्वर। ग्राम पोखरी, पोखरी डांडा, घयालगांव व सैंज आदि में गत मार्च से पेयजल की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के साथ ही प्राथमिक विद्यालय पोखरी की भोजन माता भी दो किमी दूर हैंडपंप से पीने का पानी सिर पर लाने को मजबूर है।
वर्ष 1984-85 में नौगांव के प्राकृतिक जलस्रोत से पोखरी, पोखरी डांडा, घयालगांव और सैंज गांव के ग्रामीणों के लिए पेयजल योजना बनाई गई। कुछ समय तक तो गांव में पानी ठीक आया, लेकिन मार्च के बाद पानी आना बंद हो गया। इससे ग्रामीणों के लिए टैंकर से पानी सप्लाई किया गया। जल संस्थान कोटद्वार ने ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चार हैंडपंप भी लगाए, जिसमें से तीन खराब हो गए। वर्तमान में एकमात्र हैंडपंप से पीने का पानी आता है, जिस पर हमेशा ग्रामीणों की भीड़ लगी रहती है। पेयजल की समस्या के चलते चार गांवों के 50 परिवारों के साथ ही प्राथमिक विद्यालय पोखरी में पढ़ने वाले 35 बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन बनाने के लिए भोजन माताओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण नरेंद्र बिष्ट, विनीता बिष्ट, बबीता बिष्ट, नारदा देवी, बचुली देवी, नीलम नेगी, अर्मिता, हिमांशी बिष्ट, बबली देवी, अनीषा बिष्ट, शीतल व शकुंतला देवी आदि का कहना है कि उनके गांव में हमेशा से ही पीने के पानी की समस्या रही है, जिसको दूर करने के लिए किसी भी जनप्रतिनिधि ने दिलचस्पी नहीं ली। कहा कि कीम गधेरा पंपिंग योजना का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन इस योजना को अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
जल संस्थान कोटद्वार के जेई रतन सिंह रावत ने कहा कि इस साल बारिश कम होने के कारण स्रोत में पानी कम मात्रा में है। एक टीम प्राकृतिक स्रोत पर भेजी जा रही है। एक सप्ताह के भीतर गांव में पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
चाई दमराड़ा के ग्रामीणों ने रोका मुंजरा गांव का पानी
तहसील दिवस में शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान
अमर उजाला ब्यूरो
यमकेश्वर/कोटद्वार। यमकेश्वर ब्लॉक के अंतर्गत चाई दमराड़ा के ग्रामीणों की दबंगई के चलते मुंजरा गांव के ग्रामीणों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। मुंजरा गांव में गत मई से पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को तीन किमी दूर बिथ्याणी तहसील स्थित हैंडपंप से पीने का पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
वर्ष 1984-85 में चाई दमराड़ा और मुंजरा गांव में पेयजल की समस्या को देखते हुए सरकार ने डांडा दमराडा स्थित ढ़ौं गदेरा से पेयजल योजना निर्माण को स्वीकृति प्रदान की। योजना निर्माण के करीब 20 वर्ष बाद कार्यदायी संस्था जल निगम ने इस योजना को वर्ष 2011 में जल संस्थान के हैंडओवर कर दिया। पेयजल योजना बनने के बाद से दोनों गांवों के लोगों को नियमित रूप से पेयजल की आपूर्ति होती रही। बीती मई में चाई दमराड़ा के ग्रामीणों ने दबंगई दिखाते हुए मुंजरा गांव की पेयजल लाइन पर कपड़ा और बजरी भरकर पेयजल आपूर्ति ठप कर दी, तब से गांव में पेयजल की समस्या बनी हुई है। तहसील दिवस में शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो रहा है।
ग्रामीण राजेंद्र सिंह नेगी, ममता, रेखा देवी, धनपत सिंह, बीना देवी, सावित्री देवी, संतोषी देवी, सरोज देवी, दीपा देवी, सरोजनी देवी, सोहन सिंह, शकुंतला देवी व मनोहर सिंह आदि ने बताया कि गांव में पेयजल की समस्या बनी हुई है। गांव में वर्तमान में 12 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश बुजुर्ग महिलाएं और पुरुष हैं। ग्रामीणों को तीन किमी दूर बिथ्याणी तहसील स्थित हैंडपंप से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मुजरा गांव में पेयजल किल्लत की समस्या का समाधान जल्द निकाल लिया जाएगा। यह मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी लाया गया है।
-कैलाश बिडालिया, तहसीलदार यमकेश्वर।