उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने इसी बजट सत्र में स्थायी राजधानी गैरसैंण में बनाने संबंधी विधेयक लाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया। कहा कि सरकार जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय नहीं ले रही है।
बुधवार को यूकेडी कार्यकर्ता हिंदू पंचायती धर्मशाला में एकत्र हुए। जहां से जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता झंडाचौक पहुंचे और प्रदेश सरकार के पुतले को आग के हवाले किया। इस मौके पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार जनविरोधी निर्णय ले रही है। कोटद्वार में पहले जनभावनाओं के खिलाफ नगर निगम थोपा गया, इसके बाद नए शामिल गांवों में जबरदस्ती जिला विकास प्राधिकरण थोप दिया। वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम बनने के दो साल बाद भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, लेकिन बावजूद इसके जनता से सीवर टैक्स वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं नगर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था और पार्किंग की सुविधा भी नहीं है। आवारा पशुओं की समस्या भी जस की तस बनी हुई है। जबकि आठ साल बाद भी बस अड्डे का निर्माण अधर में लटका हुआ है। इस मौके पर नगर निगम द्वारा दुकानों से लाइसेंस शुल्क वसूलने का पुरजोर विरोधकर इसे वापस लेने, सीवरेज सुविधा उपलब्ध कराने, सड़कों से अतिक्रमण हटा पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराने, डीडीए को समाप्त कराने आंदोलनकारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाने, वन रक्षक भर्ती परीक्षा की सीबीआई जांच कराने, प्रधानमंत्री सड़क योजना में हुए घोटाले की जांच कराने की मांग की गई। पुतला दहन करने वालों में आशीष गौनियाल, डा. प्रकाश बरमाड़ा, यतेंद्र भट्ट, गुलाब सिंह रावत, भूपाल सिंह रावत, इकरामुद्दीन, बंटी सिंह नेगी, राजपाल सिंह, ब्रह्मानंद भारद्वाज, विनय त्रिपाठी, सतीश मैंदोला आदि शामिल रहे।
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