चारधाम यात्रा सीजन में बसों की अतिरिक्त व्यवस्था कराने के बजाय सरकार गढ़वाल मंडल ऑनर्स यूनियन लिमिटेड और गढ़वाल मंडल बहुउद्देश्यीय समिति की 39 बसें यात्रा मार्गों पर चलवा रही है। मात्र पंद्रह बसें ही स्थानीय लोगों के सफर के लिए बची हैं। इससे यहां लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग मजबूरी में टैक्सियों का सहारा ले रहे हैं। टैक्सी वाले भी मौके का लाभ उठाते हुए किराया 10 से 20 फीसदी अधिक वसूल रहे हैं।
गढ़वाल मंडल ऑनर्स यूनियन लिमिटेड के स्टेशन प्रभारी अरुण रावत के अनुसार, बेड़े में 29 बसें हैं। 21 बसें चारधाम यात्रा मार्गों पर संचालित किए जाने से यहां अब केवल आठ ही बसें रह गई हैं। इससे बहेड़ाखाल, ल्वाली, कालेश्वर, चौबट्टाखाल, पातल, देहलचौरी, पौड़ी, श्रीनगर, कोटद्वार आने-जाने वाले लोग परेशान हो रहे हैं।
गढ़वाल मंडल बहुउद्देश्यीय समिति के स्टेशन प्रभारी रमेश चंद्र उप्रेती ने बताया कि बेड़े में 25 बसें हैं, 18 बसें यात्रा मार्गों में भेज दी गई हैं। सात बसें बची हैं। इसके चलते थलीसैंण, त्रिपालीसैंड, स्योलीखंड, ऋषिकेश, हरिद्वार आने-जाने वाले यात्री दिक्कत उठा रहे हैं। लोगों को वाहन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
दिल्ली-दून जाने वाले भी रहे परेशान
पौड़ी। दिल्ली में इग्नू से बीसीए कर रहे मोहित रावत ने बताया कि वह ल्वाली गांव निवासी है। छुट्टियां बिताने के बाद दिल्ली लौट रहा है। सुबह छह बजे से बस अड्डे में खड़ा है, दस बज चुके हैं बस नहीं मिली। पौड़ी गांव निवासी बीए में अध्ययनरत विकास नेगी, सचिन रावत ने बताया कि किसी काम से दिल्ली जा रहे हैं। सुबह से बस अड्डे पर खड़े हैं तीन घंटे बीत गए लेकिन बस नहीं मिल रही। वन विभाग से सेवानिवृत्त हुकुम सिंह रावत ने बताया कि वे देहरादून जा रहे हैं।