श्रीनगर/थराली। हाल ही में प्रदेश में हुई बादल फटने की घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं ने न केवल भारी जन-धन की हानि पहुंचाई है बल्कि इसका लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ा है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मन में भय, असुरक्षा और तनाव की स्थिति बढ़ गई है।
मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहित सैनी का कहना है कि अचानक आई आपदा का अनुभव लोगों को गहरे मानसिक आघात से गुजरने पर मजबूर कर देता है। कई लोग पीटीएसडी (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं जिसमें नींद न आना, बार-बार घटना की याद आना और छोटी-सी भी मौसम में बदलाव होने पर घबराहट महसूस करना जैसे लक्षण शामिल हैं। डॉ. सैनी सलाह देते हैं कि ऐसे लोगों को तत्काल मनोवैज्ञानिक परामर्श की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लोग अपने मन की बात परिवार और दोस्तों से साझा करें, योग और सामूहिक प्रार्थना जैसी गतिविधियों में हिस्सा लें, और अकेलेपन से बचें।
थराली में भी दिखा असर, प्रभावितों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव
थराली और चेपड़ों क्षेत्र में 22 अगस्त की मध्य रात्रि को हुई भारी बारिश से प्रभावित लोग अभी भी उबर नहीं पाए हैं। इस आपदा में 12 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, 37 को आंशिक नुकसान पहुंचा और 150 से अधिक मकान खतरे की जद में हैं। राड़ीगांव के जगदीश पंत ने बताया कि उनके दो मकान अब रहने लायक नहीं हैं। उनकी माता गोबिंदी देवी का स्वास्थ्य और बिगड़ गया है जबकि उनका अपना वजन भी 62 से 56 किलो हो गया है। पुष्पा देवी का शुगर और बीपी भी लगातार बढ़ा हुआ है। गांव के दिनेश पंत, महेश चंदोला, हरेंद्र रावत,नरेंद्र बिष्ट, मदन मोहन भी इसी मानसिक स्थिति से गुजर रहे हैं। सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. अमित ने बताया कि आपदा के बाद से बीपी और शुगर के मरीजों की संख्या बढ़ी है जो कि तनाव और चिंता का परिणाम हो सकता है।