राजकीय मेडिकल कालेज में नियम विरुद्ध सहायक अभियंता की नियुक्ति मामले में फंसी पूर्व प्राचार्य प्रो. आईएस योग को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने योग के वेतन से वसूली के शासनादेश को निरस्त करने से मना कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने वेतन से एक तिहाई वसूली के बजाय प्रतिमाह 25 हजार रुपये कटौती के आदेश दिए हैं।
बता दें कि फरवरी 2016 में तत्कालीन प्राचार्य प्रो. योग की ओर से सहायक अभियंता पद पर आशीष ठाकुर की संविदा पर नियुक्ति की गई थी, जबकि कालेज के ढांचे में पद स्वीकृत नहीं था और नियुक्ति प्रक्रिया नियमानुसार नहीं अपनाई गई। 27 जुलाई को चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने शासन को पत्र भेजकर बताया कि नियमानुसार नियुक्ति नहीं होने के कारण ठाकुर का वेतन आहरित नहीं हो पा रहा है।
इस पर कार्रवाई करते हुए 29 अगस्त को चिकित्सा शिक्षा सचिव डा. पंकज पांडेय ने ठाकुर की नियुक्ति को असंवैधानिक मानते हुए प्रो. योग के वेतन से कटौती करते हुए ठाकुर का वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए। शासन के आदेश पर कालेज प्रशासन ने प्रो. योग के वेतन से तीन किश्तों में ठाकुर को मिलने वाले वेतन 2.45 लाख रुपये के भुगतान के निर्देश जारी किए।
अब तक योग से दो किश्त वसूली जा चुकी है, लेकिन इस बीच प्रो. योग इस आदेश को एकतरफा और असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चली गई। कालेज के वित्त नियंत्रक विवेक स्वरूप ने बताया कि न्यायालय ने वसूली आदेश को सही माना है। न्यायालय के आदेश पर अब उनके वेतन से प्रतिमाह 25 हजार रुपये की कटौती होगी।