शिक्षा महानिदेशक की ओर से एक साल पूर्व पदोन्नति संशोधन का आदेश रद्द होने के बाद भी कतिपय शिक्षक मनचाहे स्थानों पर डटे हुए हैं। आलम यह है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेश के अनुपालन में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने डेढ़ माह पूर्व खंड शिक्षा अधिकारियों से ही दोषी प्रधानाचार्यों/अधिकारियों को नोटिस जारी करने के साथ ही सूचना देने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई।
2 मई 2015 को शिक्षा निदेशालय ने 96 शिक्षकों की पदोन्नति संशोधन आदेश जारी किए थे। दरअसल 21 अक्तूबर 2013 को एलटी संवर्ग के लगभग 1383 शिक्षकों का प्रवक्ता पद पर प्रमोशन किया गया था। प्रथम नियुक्ति और पदोन्नति पर दुर्गम विद्यालयों में तैनाती के नियम होने की वजह से शिक्षकों की तैनाती दुर्गम विद्यालयों में की गई, लेकिन कुछ शिक्षकों ने पहाड़ चढ़ने के बजाय सुगम स्थान पर टिके रहना उचित समझा। लेकिन 2 मई को 96 शिक्षकों की पदोन्नति संशोधन करते हुए उन्हें मनचाहे तैनाती स्थल दे दिए गए। मामला प्रकाश में आने पर 15 मई को शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने समस्त पदोन्नति संशोधन आदेश निरस्त कर दिए थे।
उसके बाद छह जून को निदेशालय ने आदेश जारी करते हुए शिक्षकों को मूल विद्यालय में लौटने को कहा। इसके बाद भी कतिपय शिक्षकों ने आदेश को नहीं माना। जवाब में पुन: शिक्षा निदेशालय ने 6 फरवरी 2016 को मुख्य शिक्षा अधिकारी और 27 फरवरी को मुख्य शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश पत्र भेजे। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों/प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी करते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए, लेकिन सीईओ के आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीईओ एमएस रावत का कहना है कि निदेशालय से पत्र मिला था, जिसके अनुपालन में बीईओ से सूचना मांगी गई है। जो अभी मिली नहीं है।