पुलिस गिरफ्त में फायरिंग की घटना करने और कराने के तीनों आरोपी।
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कोतवाली पुलिस ने पिछले 24 दिसंबर की रात ट्रांसपोर्टर के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना का खुलासा किया। मामले में पुलिस ने प्रापर्टी डीलिंग कर रहे प्राइमरी का शिक्षक व उसके द्वारा भाड़े पर लाए गए दो शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार फायरिंग की घटना पदमपुर सुखरो की 12 बीघा जमीन के विवाद से जुड़ी है। शूटरों को हत्या करने को तीन लाख की सुपारी दी गई थी।
शनिवार को कोटद्वार कोतवाली में सीओ अनिल जोशी ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बताया कि ट्रांसपोर्टर शिशुपाल सिंह नेगी के जीवानंदपुर स्थित घर के बाहर दो बाइक सवार बदमाशों ने दो फायरिंग की थी। ट्रांसपोर्टर की तहरीर के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज व जांच के आधार पर पुलिस ने शूटरों को दबोचने के लिए जाल बिछाया। बताया कि शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे सुखरो पुल पर संदिग्ध रूप से एक बाइक पर जा रहे दो युवकों को रोका गया। पूछताछ में एक ने अपनी पहचान हर्षदीप निवासी जमालपुर थाना रामराज और दूसरे ने सचिन चौधरी निवासी ग्राम नसीरपुर थाना तितावी जिला मुजफ्फरनगर यूपी बताई।
सख्ती से हुई पूछताछ में दोनों ने जीवानंदपुर में हुई फायरिंग की घटना को कबूल लिया। बताया कि फायरिंग की घटना उन्होंने कोटद्वार के शिवपुर निवासी प्रापर्टी डीलिंग कर रहे शिक्षक धीरेंद्र सिंह रावत से सुपारी लेकर की थी। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर घटना में शामिल रिवाल्वर और एक पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इसके बाद घटना के मास्टर धीरेंद्र सिंह रावत को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उसने पुलिस को बताया कि योगंबर सिंह नेगी, दुर्गेश ममगाईं, अमित देवरानी, राजेंद्र मैंदोली और मोहित अग्रवाल से उसकी पदमपुर सुखरो स्थित कच्ची नाली में 12 बीघा जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर विवाद और रंजिश चल रही थी। योगंबर से उसे जान का खतरा बना था। उसे डराने के इरादे से उसके छोटे भाई शिशुपाल नेगी के घर के बाहर शूटरों से फायर करवाया। सीओ मनोज रतूड़ी ने बताया धीरेंद्र सिंह रावत ने शूटरों को इस काम के लिए तीन लाख देने की बात कही थी, जिसमें एक लाख 80 हजार एडवांस दिए थे। उसी ने शूटरों को मोटर साइकिल, पिस्टल और रिवाल्वर भी उपलब्ध कराया था।