सरकार की अधकचरी योजनाओं के चलते क्षेत्र के किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। पहले तो उद्यान विभाग ने किसानों को सब्जी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया, उन्हें सब्सिडी पर बीज भी दिए गए। किसानों ने भी पैसा कमाने के उद्देश्य से अपनी पूरी भूमि पर गेहूं चावल की खेती छोड़कर विभागीय अधिकारियों के कहने पर सब्जी की खेती कर डाली। अब जब सब्जी से किसानों के खेत लहलहाने लगे हैं तो विभाग ने सब्जी के विपणन में हाथ खड़े कर दिए हैं।
विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि कृषि मंडी समिति द्वारा नैनीडांडा और शंकरपुर में स्थापित विपणन केंद्र भवन बंद पडे़ हैं। सरकार न तो विपणन केंद्रों को संचालित करा रही है और न ही विपणन की सुविधा दे रही है। ऐसे में स्थानीय किसानों ने अपनी जमा पूंजी सब्जी के उन्नत बीजों और कीटनाशकों पर लगा दी। लेकिन, कृषि उपज के विपणन के कोई इंतजाम न होने से उनकी फसल खराब हो रही है।
नैनीडांडा के उन्नतशील कृषक वीर सिंह रावत व महेंद्र पटवाल ने बताया कि उन्होंने नौणियाखेत में 25 नाली जमीन में टमाटर, बैंगन, फ्रासबीन, शिमला मिर्च, खीरा आदि का भारी मात्रा में उत्पादन किया है। विभाग से प्रशिक्षण लेने के बाद वे सब्जी उत्पादन कर रहे हैं। उन्नत किस्म के बीज के साथ ही जैविक खाद का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन, विपणन के कोई इंतजाम न होने से फसल खराब हो रही है।
उधर, जिला उद्यान अधिकारी डा. नरेंद्र कुुमार ने बताया कि फिलहाल विभाग के पास विपणन की व्यवस्था नहीं है। सब्जियों के रखरखाव के लिए विभाग किसानों को पचास प्रतिशत सब्सिडी पर कैरेट उपलब्ध कराता है।