कैंट सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन लैंसडौन ने सिविल क्षेत्र को सैन्य क्षेत्र से अलग करने का दिया सुझाव दिया है। रक्षा मंत्रालय को ईमेल के माध्यम से भेजे गए सुझाव में सुमित बोस की सिफारिश के आधार पर छावनियों के सिविल प्रशासन को स्थानीय निकायों को सौंपने की मांग की गई।
एसोसिएशन के सचिव कुलदीप सिंह बिष्ट, व्यापार मंडल अध्यक्ष राजेश ध्यानी, सामाजिक कार्यकर्ता राजीव आनंद ने रक्षा मंत्रालय को भेजे सुझाव में प्रस्तावित छावनी अधिनियम प्रारूप को असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक बताया। कहा कि प्रस्तावित मसौदे में निर्वाचित बोर्ड की ताकत मुख्य अधिशासी अधिकारी के सुपुर्द की गई है और बोर्ड का सदस्य सचिव बनाकर वोट का अधिकार भी दे दिया है। जबकि किसी भी सरकारी अधिकारी को बोर्ड का सदस्य बनाना निर्वाचित सदन व जनता का अपमान है। कहा कि छावनी बोर्ड एक स्वायत्तशासी संस्था है। बोर्ड में नामांकित सदस्यों की संख्या निर्वाचित सदस्यों से ज्यादा रखी गई है। साथ ही उन्हें मतदान का अधिकार भी दिया गया है, जो जनता के हितों पर कुठाराघात है। कहा कि निर्वाचित सदन में सरकारी अधिकारियों को पदेन सदस्य बनाने का प्रावधान संवैधानिक व्यवस्था की अवधारणाओं के विपरीत है।