गढ़वाल विश्वविद्यालय में पंडित मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड टीचिंग की ओर से उच्च शिक्षा में कार्यरत शिक्षक शिक्षिकाओं के लिए छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में राज्य भर के करीब 40 शिक्षक भाग ले रहे हैं।
इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के व्यावसायिक कौशल में सुधार लाना है। निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए भारत सरकार ने विभिन्न विश्वविद्यालयों में फैकल्टी डेवलपमेंट केंद्र स्थापित किए हैं।
सोमवार को चौरास परिसर स्थित एकेडमिक सेंटर में कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व ओएसडी (विज्ञान एवं तकनीकी) डा. ओपी पांडे ने कहा कि शिक्षकों के व्यावसायिक कौशल में सुधार से पहले उन्हें मानवीय चेतना के लिए तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण लोकसभा या राज्यसभा में नहीं होता है, बल्कि विद्यालयों में चल रही कक्षाओं में होता है। विशिष्ट अतिथि गढ़वाल विवि के ओएसडी प्रो. डीएस नेगी ने कहा कि इस कार्यशाला की शिक्षकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यशाला में प्रतियोगिता के इस दौर के लिए शिक्षकों को तैयार करना है। वर्तमान के वैश्वीकरण के दौर में सभी क्षेत्रों में प्रतियोगिता का युग शुरू हो गया है, जिससे प्रत्येक के सामने अपने को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की चुनौती है।
प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि वर्तमान की भारतीय शिक्षा उद्देश्य विहीन हो गई है। शिक्षा के क्षेत्र में हमारा देश पिछड़ रहा है। हम ऐसे छात्र तैयार कर रहे हैं जो कौशलविहीन है। वर्तमान समय में कौशलपूर्ण छात्रों को तैयार करने की आवश्यकता है। कार्यशाला के आयोजक प्रो. पीके जोशी ने सभी अतिथियों को आभार व्यक्त किया। साथ की कार्यशाला के बारे में बारीकी से जानकारी दी।