उत्तराखंड में स्वच्छ भारत मिशन स्वजल (ग्रामीण) के तहत बनाए जा रहे शौचालयों के आंकड़ों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वाधिक पढ़े-लिखे शहरों में सबसे अधिक लोग खुले में शौच कर रहे हैं। सबसे अधिक साक्षरता वाला जिला अल्मोड़ा शौचालय निर्माण में सबसे फिसड्डी है। इस जिले में 65.71 फीसदी शौचालय ही बन सके हैं। गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी जनपद प्रदेश में नौवें स्थान पर है।
स्वच्छ भारत मिशन स्वजल के तहत शौचालय निर्माण में देशभर में उत्तराखंड छठे नंबर पर है। सिक्किम सौ फीसदी और केरल 98 फीसदी शौचालय बनाकर क्रमश: पहले और दूसरे नंबर पर हैं। बिहार और उड़ीसा इस वक्त देश में सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। बिहार ने मात्र 25 फीसदी ही शौचालय बनाए हैं।
पौड़ी जनपद में वर्ष 2015 तक 147653 परिवारों के सापेक्ष 75.40 फीसदी यानी 111340 परिवारों के शौचालय बन चुके हैं। इस प्रकार पौड़ी जिला राज्य में नौवें स्थान पर है। मैदानी इलाकों में 87 फीसदी शौचालय निर्माण का लक्ष्य पाकर दून टॉप पर है। पर्वतीय इलाकों में नैनीताल अव्वल है। यहां 85 फीसदी परिवारों ने शौचालय बना लिए हैं। साक्षरों के शहर अल्मोड़ा जिले में 65.71 फीसदी ही शौचालय बन सके हैं।
पिथौरागढ़ जनपद ने इस मामले में आगे है। यहां 76.41 फीसदी शौचालय यहां बन चुके हैं और स्वजल के आंकड़ों की मानें तो यहां पर शौचालय निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। परियोजना प्रबंधक स्वजल आरएस चौहान बताते हैं कि पौैड़ी जिले में शत प्रतिशत शौचालय बनाने के लिए वर्ष 2018 का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रथम चरण में इस साल जनपद के सात ब्लाकों पौड़ी, खिर्सू, दुगड्डा, कोट, एकेश्वर, पोखड़ा, जयहरीखाल को खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
अल्मोड़ा जैसे पढ़े-लिखों के शहर का शौचालय निर्माण में पिछड़ना हैरत की बात है। पौड़ी भौगोलिक रूप से बड़ा है। वहां पर भी काम तेज होगा। सामग्री की दिक्कत सामने आई थी, उसे दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। निर्माण की धनराशि लोगों को शीघ्र दी जाएगी।
- डा. रंजीत कुमार सिन्हा, निदेशक परियोजना प्रबंधक इकाई स्वजल देहरादून