नैनीडांडा विकासखंड के पाण्ड गांव के लोगों की बैठक में स्वयं के खर्चे पर गांव का विकास करने का निर्णय लिया गया है। कहा कि सत्तर परिवारों वाले पाण्ड गांव के विकास में अस्सी के दशक से कड़े वन कानून आड़े आ रहे हैं।
अविभाजित यूपी सरकार के समय से ही गांव की अनदेखी के चलते लोग आज भी आदम युग की तरह जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने गांव में पुन: प्राथमिक विद्यालय खोलने की मांग की है।
जगतराम सुुंद्रियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने पाण्ड गांव का विकास का बीड़ा उठाते हुए सरकार और जिला प्रशासन पर उनके गांव की अनदेखी का आरोप लगाया। कहा कि सरकार के एक फरमान ने जहां उनके गांव को कार्बेट टाइगर रिजर्व का हिस्सा बना दिया, वहीं ग्रामीणों को आज भी सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। वन्यजीव बहुल क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवर खेतीबाड़ी चौपट कर देते हैं।
ग्रामीणों ने एक स्वर से मांग की है कि राज्य व भारत सरकार उनके गांव को वह सुविधाएं प्रदत्त करें जो देश के दूसरे गांवों के नागरिकों को हासिल है।बैठक में उदयराम सुंद्रियाल, बिहारीलाल, सावित्री देवी, भारती देवी, धनेश्वरी देवी, अनिल घनसेला और प्रदीप घनसेला समेत कई लोग मौजूद थे।