पर्यटन नगरी लैंसडौन के लिए सात सवारियों को लेकर उत्तराखंड परिवहन निगम की बस मंगलवार को रवाना हुई। पिछले पांच दिन से रोडवेज को लैंसडौन के लिए सवारियां नहीं मिल रही थी, जिससे सेवा का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा था। कोटद्वार से लालढांग होते हुए देहरादून के लिए चलने वाली बस में सवारियों की संख्या बढ़ने लगी है। बीरोंखाल और त्रिपालीसैंण के लिए बुधवार से बस सेवाओं का संचालन शुरू करने की तैयारी है।
मंगलवार को लैंसडौन के लिए सवारियां मिलनी शुरू हुई। रोडवेज के स्टेशन अधीक्षक अनुराग पुरोहित ने बताया कि एक जुलाई से बीरोंखाल और त्रिपालीसैंण के लिए भी बस सेवा शुरू की तैयारी है। वाया लालढांग चलाई जा रही देहरादून वाली बस में यात्रियों की संख्या में इजाफा होने से रोडवेज प्रबंधन उत्साहित है। एजीएम टीकाराम आदित्य ने बताया कि मंगलवार को श्रीनगर के लिए 12, देहरादून के लिए 20, रिखणीखाल लिए छह, धुमाकोट के लिए पांच, झंडीचौड़ के लिए सात, हरिद्वार के लिए आठ और लैंसडौन के लिए सात सवारियां लेकर बस गंतव्य के लिए रवाना हुई है।
जीएमओयू ने की 280 बसें की सरेंडर
कोटद्वार। करीब 400 वाहनों के बेड़े वाली उत्तराखंड की सबसे बड़ी निजी परिवहन कंपनी जीएमओयू ने 280 बसें परिवहन कार्यालयों में सरेंडर कर दी हैं। जीएमओयू समेत राज्य की सभी निजी कंपनियों की ओर से अपने वाहनों को सरेंडर कराने का सिलसिला जारी है।
कोरोना संकटकाल में एक साल का टैक्स और बीमा माफ करने की मांग को लेकर अड़ी जीएमओयू ने 30 जून तक अपने 280 बसों के परमिट और अन्य दस्तावेज कोटद्वार, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जनपदों में सरेंडर करा दिए हैं। जीएमओयू के अध्यक्ष जीत सिंह पटवाल का कहना है कि कोरोना संकटकाल की मार जीएमओयू समेत सभी निजी कंपनियों पर पड़ी है। ऐसे में मोटर मालिक सरकार से एक साल का टैक्स माफ करने की मांग कर रहे हैं।