डॉ. पीताबंर दत्त बड़थ्वाल हिमालयन राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एमएससी (भौतिकी) की छात्रा अनुजा ढुकलान को बिराक-टाई विनर अवार्ड मिला है। बायो टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस कौंसिल की ओर से दिए जाने वाले इस अवार्ड के तहत उन्हें पांच लाख रुपये और ट्रॉफी हासिल हुई है। यह अवार्ड इनोवेशन्स और उन पर आधारित कॉमर्शियल स्टार्टअप स्थापित करने के लिए दिया जाता है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव डॉ. रेणु स्वरूप ने नई दिल्ली में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अनुजा को यह अवार्ड दिया। घमंडपुर निवासी सुरेंद्र ढुकलान की इकलौती संतान 22 वर्षीय अनुजा ने बताया कि इस अवार्ड के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उन महिला उद्यमियों से आवेदन मांगे गए थे, जिन्होंने नवाचार पर आधारित उद्योग स्थापित किए। देश भर से एक हजार से अधिक आवेदन इसके लिए आए थे। प्रथम चरण में पंद्रह महिला उद्यमियों ने पांच-पांच लाख के अवार्ड प्राप्त किए।
अनुजा ने बताया कि उसने यूफोरबिया रायलीना (सुराई, सुला, चुरी, डांडा थोर) के पौधों के लैटेक्स पर बायो इंजीनियरिंग के जरिये शिलाजीत का निर्माण किया है। शिलाजीत का इस्तेमाल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और एंटी एजिंग सप्लीमेंट के साथ ही स्टेमिना एवं शक्तिवर्धक औषधि के रूप में किया जाता है।
पिता के साथ बनाई है कंपनी
अनुजा ने अपने पिता के साथ मिलकर पैतृक गांव खांडा तल्ला (कल्जीखाल, पौड़ी गढ़वाल) में इनोवेशन्स पर आधारित शिलाजीत एवं सगंध तेल के निर्माण एवं व्यापार के लिए सुराईटेक इनोवेशन्स एलएसपी नाम की कंपनी बनाई है। इसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में रजिस्टर भी कराया है। शिलाजीत के निर्माण की प्रक्रिया पर उनकी पेटेंट एप्लिकेशन प्रकाशित हो चुकी है।
2014 में मिला यंग माइंड अवार्ड
अनुजा को 2014 में हैदराबाद में द ग्लोबल बायो बिजनेस फोरम (बायो एशिया) का यंग माइंड अवार्ड भी मिला है। यह अवार्ड उसे कैक्टस प्रजाति के एक पौधे यूफोरबिया रॉयलीना से एंटी बैक्टिरिया टर्पिनॉयड के आविष्कार के लिए जर्मनी के नोबल प्राइज विजेता (मेडिसिन) डॉ. हेराल्ड जूर हाउसैन ने प्रदान किया था। इसके तहत उन्हें 30 हजार रुपये और प्रशस्ति पत्र मिला था।