रिखणीखाल ब्लाक के अंतर्गत जीआईसी द्वारी पैनों में गिद्ध संरक्षण एवं बचाव विषय पर हुई गोष्ठी में गिद्ध संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया गया। गोष्ठी में 60 से अधिक गांवों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया।
गोष्ठी में मुख्य अतिथि महाकाली फाउंडेशन चैनपुर के उपाध्यक्ष कमलेश कंडारी ने गिद्ध संरक्षण के लिए शिक्षक दिनेश कुकरेती के प्रयासों का समर्थन किया। शिक्षक दिनेश चंद्र कुकरेती ने कहा कि कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग, वनों में अग्निकांड की बढ़ती घटनाओं और भोजन की कमी के कारण गिद्धों की संख्या में 98 फीसदी की कमी हुई है। वर्तमान में गिद्धों की महज चार प्रजातियां ही रह गई हैं। वह वर्ष 2010 से गाडियूं, नावे तल्ली गांव के जंगलों में स्थित चट्टानों में गिद्धों को बचाने में जुटे हुए हैं, जिसे अब गिद्ध संरक्षण केंद्र बना दिया गया है। यहां गिद्धों की संख्या 12 से बढ़कर 26 हो गई है। इस मौके पर ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, वन पंचायत सरपंचों, पूर्व प्रधानों, महिला मंगल दलों व ग्रामीणों ने गिद्ध संरक्षण व बचाव में सहयोग देने पर सहमति जताई। साथ ही अपनी ग्रामसभाओं में कीटनाशकों का प्रयोग प्रतिबंधित करने का भरोसा दिया। इस अवसर पर जीआईसी द्वारी के छात्र-छात्राओं ने पेंटिंग व भाषण प्रतियोगिता से गिद्ध संरक्षण व बचाव में अपनी भागीदारी निभाई।