राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध बेस अस्पताल में प्रसूताओं से इलाज के नाम पर पैसे लेने की शिकायतें मिल रही है। पैसे नहीं देने पर संबंधित चिकित्सक उनकी मरहम पट्टी को भी तैयार नहीं हो रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पतालों में जच्चा-बच्चा का सारा खर्चा सरकार वहन करती है।
अस्पताल में अपनी एक रिश्तेदार के साथ आए शगुन कुमार ने बताया कि उनकी भाई की पत्नी का एक हफ्ते पहले आपरेशन से बच्चा हुआ है। उसका आपरेशन करने वाली चिकित्सक ने उसे एक पर्ची थमाते हुए एक दवा विक्रेता को 1800 रुपये भुगतान करने की बात कही। जब चिकित्सक से कारण पूछा गया, तो उसने बताया कि आपरेशन के लिए वहां से दवाइयां मंगवाई गई हैं।
जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) के अंतर्गत डिलीवरी पूरी तरह से फ्री होती है। दवाइयां खत्म होने पर प्रबंधन अन्य जगह से व्यवस्था करता है। सामाजिक कार्यकर्ता विभोर बहुगुणा का कहना है कि चिकित्सक गरीब जनता को लूट रहे हैं। यदि दवाइयां इतनी जरूरी थी तो तीमारदार को बताया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
कोट-
मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं है। यदि पीड़ित लिखित शिकायत करें, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। डिलीवरी में एक भी रुपया नहीं लिया जाता है। परिजनों से कोई दवाइयां नहीं मंगवाई जाती हैं। - डा. सुरेश जैन, चिकित्सा अधीक्षक बेस अस्पताल
स्त्री रोग विभागाध्यक्ष देंगी रिपोर्ट
श्रीनगर। दोपहर बाद प्रसूता के पति राजेश टम्टा ने चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डा. सुरेश जैन को लिखित शिकायत दे दी। इस पर एमएस ने संबंधित चिकित्सक को भी बुलाया। पीड़ित ने बताया कि दवा विक्रेता को बिना रुपये दिए चिकित्सक उसको रिलीव नहीं कर रही है। जब उसे पता ही नहीं है कि कोई दवा बाहर से मंगवाई गई, तो वह कैसे पेमेंट कर दे। बाहर से दवा मंगवाई गई, तो उनको अवगत कराया जाना चाहिए था। चिकित्सक ने किसी ऐसी घटना से इंकार किया। उनका कहना था कि उन्होंने कोई भुगतान की बात नहीं की। एमएस ने स्त्री रोग विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रकरण की जांच करने को कहा है।