श्री सिद्धबली महोत्सव के दूसरे दिन शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने नोट बंदी को लेकर केंद्र सरकार पर पाश्चात्य संस्कृति को बढ़ाने का आरोप लगाया।
कहा कि भारत देश पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहा है। यहां शुद्ध खान-पान को छोड़कर बच्चे पिज्जा बर्गर, चाऊमीन खाकर अपना शरीर का नाश कर रहे हैं, उसी प्रकार भारत सरकार विदेशों की तरह कैश लेस पद्धति अपनाकर लोगों को कैश लेस कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में धन को घर में रखा जाता था ताकि जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके, लेकिन अब धन बैंक के अधीन है। जब धन की जरूरत होती है तो बैंक में कैश समाप्त हो जाता है, रविवार को बैंक बंद रहता है। इसके कारण लोगों को अपने धन के लिए दूसरे पर निर्भर होना पड़ रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति से दूर रखने को कहा।
इससे पूर्व श्री सिद्धबली मंदिर में सुबह पांच बजे ज्योतिषाचार्य पंडित देवी प्रसाद भट्ट के सानिध्य में 14 वेदपाठियों ने वैदिक मंत्रोचार के बीच पिंडी महाभिषेक और एकादश कुंडलीय यज्ञ का आयोजन किया। श्रद्धालुओं ने एकादश कुंडलीय यज्ञ में आहुति दी और बाबा के दर्शन किए।
इस अवसर पर श्री सिद्धबली बाबा मंदिर के महंत दिलीप सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, हेमलता नेगी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुमन कोटनाला, भरत माता मंदिर के महंत ललिता गिरिजी महाराज, मेला संयोजक अनिल कंसल, मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी, पूर्व विधायक भारत सिंह रावत, जीत सिंह पटवाल, रमेश चंद्र सिंह रावत, रविंद्र नेगी, रविंद्र जजेड़ी, ओमप्रकाश तिवारी, प्रेम सिंह रावत, धर्मवीर गुसाई, विपिन कैंथोला, अनिल बंसल, प्रमोद रावत आदि मौजूद थे।