मंडल मुख्यालय पौड़ी के पाबौ-थलीसैंण ब्लाक के राठ क्षेत्र स्थित मां कालिंका देवी के दरबार में शनिवार को श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। देव डोलियों के साथ नाचते-गाते श्रद्धालु मां कालिंका का जयघोष करते हुए मंदिर पहुंच रहे थे। मेले में इस बार भी निरीह पशुओं की बलि नहीं चढ़ी। मां के दरबार में लगने वाला बुंखाल मेला पशुबलिविहीन शांतिपूर्वक संपन्न हो गया।
बुंखाल मेले में कोई भी श्रद्धालु बलि देने के लिए बागी और बकरा लेकर नहीं पहुंचा। सिमल्थ, मिलई, नाई, चोपड़ा, मलूड, गोदा, ओडली, मथिगांव समेत कंडारस्यूं और ढाईजुली पट्टी के करीब डेढ़ सौ गांवों के लोग ढोल दमाऊं के साथ देवी देवताओं की डोलियों के देवी के दरबार पहुंचे। नारियल चढ़ाकर देवी की सात्विक पूजा की।
वरिष्ठ भाजपा नेता डा. धन सिंह रावत ने कहा कि पशुबलि न हो, इसके लिए केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, राठ क्षेत्र के कंडारस्यूं-ढाईजुली पट्टी के ग्रामीणों, जिला प्रशासन और मेला समिति ने योगदान दिया। आज हम राठी मां की सात्विक पूजा कर रहे हैं। निरीह पशुओं की बलि थमी है।
पुलिस ने बनाए थे चेक पोस्ट
मां कालिंका के द्वार पर हालांकि करीब तीन साल से पशुबलि नहीं हो रही है। फिर भी कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पुलिस-प्रशासन भी मुस्तैद रहा। इसके लिए जगह-जगह चेक पोस्ट बनाए हुए थे। जिनमें पुलिस फोर्स तैनात थी।
मेले में सुबह से पहुंचने लगे थे श्रद्धालु
बुंखाल मेले में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर में बने बलि कुंड के समीप हवन-पूजन किया गया। कुंड में पूजा अर्चना के साथ नारियल और तेल चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों से मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कुंड में नारियल, तेल और पूजन सामग्री चढ़ाई।
60 हजार श्रद्धालुओं ने भंडारे में लिया प्रसाद
मां कालिंका के द्वार पर लगे बुंखाल मेले में वरिष्ठ भाजपा नेता डा. धन सिंह रावत एवं उनके सहयोगियों की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया था। मंदिर मेला समिति के अध्यक्ष बालम सिंह कंडारी ने बताया कि सुबह छह बजे से ही भंडारे में प्रसाद वितरण का कार्य शुरू हो गया था।
दोपहर तीन बजे तक करीब 60 हजार श्रद्धालु भंडारे में प्रसाद ले चुके थे। इस दौरान मातबर सिंह रावत, गिरीश पैन्यूली, विकास हंस, महेश सिंह, वीरेंद्र रावत आदि का सहयोग रहा।
दोपहर बारह बजे के बाद से पहुंचने लगी डोलियां
दोपहर बारह बजे के बाद मेले में गांवों से देवी देवताओं की डोलियों का आगमन शुरू हुआ। डोली को ढोल दमाऊं के साथ मंदिर तक लाया गया। डोलियों के आगे-आगे श्रद्धालु मां के जयकारों के साथ नाचते हुए चल रहे थे। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन काला भी मां के दरबार में पूजन के पहुंचे।
डांडी कांठी संस्था के राकेश खंकरियाल, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल कहते हैं कि देवी देवताओं की डोलियां लाने का रिवाज शुरू होने से इस मेले को नया स्वरूप मिला है।