पनियाली गदेरा और सत्तीचौड़, मवाकोट क्षेत्र में कहर बरपाने वाले ग्वालगढ़ गदेरे की सरकारी मशीनरी ने सुध नहीं ली है। अतिक्रमण की भेंट चढ़े पनियाली गदेरे में मलबा भरा हुआ है। पिछले वर्षों आई आपदा को देखते हुए पनियाली और ग्वालगढ़ गदेरों को अतिक्रमण मुक्त कर चैनलाइजेशन की दरकार है।
गत पांच वर्षों से पनियाली गदेरे में आए उफान से जौनपुर, सिताबपुर, आर्मी की सीएसडी कैंटीन, एमटी कैंप क्षेत्र, पालिका की रिफ्यूजी कालोनी, बिजली घर, सूर्यनगर, प्रतापनगर, देवी नगर, शिवपुर, मानपुर, पदमपुर, कौड़िया आदि क्षेत्रों में बाढ़ आ चुकी है, जिसमें अब तक करीब आठ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लोगों का लाखों का नुकसान हो चुका है। वर्तमान में आलम यह है कि पनियाली गदेरे में पूर्व में बनाई गई सुरक्षा दीवार के ऊपर भी लोगों ने अतिक्रमणकर झोपड़ी और मकान बना दिए हैं। गदेरे के दोनों ओर शिवपुर से सिताबपुर तक लोगों ने अतिक्रमण कर दिया है। लोगों का कहना है कि रिवर ट्रेनिंग पालिसी के तहत नदियों को तो चैनलाइजेशन किया जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत वाले पनियाली और ग्वालगढ़ गदेरों को जस का तस छोड़ दिया गया है। नायब तहसीलदार डीएस नेगी का कहना है कि अभी पनियाली और ग्वालगढ़ गदेरे में चैनलाइजेशन के लिए प्रस्ताव नहीं बनाया गया है। शीघ्र इस पर काम किया जाएगा।