कोटद्वार। साहित्यांचल साहित्यिक संस्था की ओर से गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उपस्थित लोगों में देशभक्ति का भाव जागृत किया।गोविंदनगर स्थित चंद्र ज्योति भवन में आयोजित काव्य गोष्ठी की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। डॉ. मनारेमा ढौंडियाल और डॉ. नंद किशोर ढौंडियाल ने सरस्वती वंदना ज्योतिर्मय कर दे की प्रस्तुति दी। अधिवक्ता निशीथ माहेश्वरी ने जन-जन में उल्लास, अनुसूया डंगवाल ने हे प्रभु आप ऐसा कर दीजिए, हममें सद्बुद्धि भर दीजिए कविता सुनाई।
युवा कवि अमित नैथानी ने ऐ वतन, जान मेरी, मेरे दम से है शान मेरी कविता सुनाकर उपस्थित लोगों में देशभक्ति का भाव जागृत किया। बीईएल की राजभाषा अधिकारी माधुरी रावत ने मेरा गढ़वाल क्या तुमने देखा है मेरा गढ़ देश के माध्यम से उत्तराखंड को नजदीक से देखने का आह्वान किया। डॉ. मंजू कपरवाण ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत इस आजादी को पाने को वीरों ने बलिदान कर दिया, बहिनों ने माथे का सिंदूर दिया कविता सुनाई। संपत्ति नेगी ने कलम जो अमर लेख लिखती है न रूकती है, न थकती है के माध्यम से लेखनी की महिमा का गुणगान किया। ललन बुड़ाकोटी ने जब से किताबों से लगाव बढ़ गया, उस दिन से अपनों में भी भाव बढ़ गया कविता सुनाई।
डॉ. नंद किशोर ढौंडियाल ने इसी दिवस से संविधान ने अपना रूप संवारा, बलवीर सिंह रावत ने हे मेयर, पार्षद प्रत्याशी, अति विनम्र और अति मृदुभाषी कविता का वाचन किया। राकेश अग्रवाल ने समस्या पूर्ति शहर बन गया, समस्याओं का अंबार, चंद्र प्रकाश ने अपनी गढ़वाली रचना जख बटि गंगा, जमुना बगणी अर, जख छीना चार धाम सुनाई। इस मौके पर प्रवेश नवानी, डॉ. मनोरमा ढौंडियाल, डॉ. गणेश मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शशिभूषण अमोली ने किया।