यमकेश्वर ब्लाक के कोटा गांव में 12 जून की रात गुलदार के हमले में दस वर्षीय अभिषेक की मौत से उसके माता-पिता दहशत में हैं। उन्होंने अब पूरे परिवार की सुरक्षा की खातिर गांव छोड़ने का फैसला किया है। मेहरबान सिंह और उनकी पत्नी सुनीता देवी अब बच्चों की जान की कीमत पर पैतृक गांव में नहीं रहना चाहते हैं। वह अब ऋषिकेश के पास के श्यामपुर गांव में किराए पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
कोटा निवासी मेहरबान सिंह मुंबई में प्राइवेट जॉब करते हैं, जबकि उनकी पत्नी सुनीता देवी अपने चार बच्चों के साथ गांव में खेती-बाड़ी कर आजीविका चला रही थी। विगत बारह जून को उनके सबसे छोटे बेटे अभिषेक की गुलदार के हमले में मौत के बाद से उन्हें अब अपने अन्य तीन बच्चों बड़े बेटे अमन, बेटी सपना और अंजली की चिंता सताने लगी है। राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे उनके गांव में अभी तक आदमखोर गुलदार न तो पकड़ा जा सका है, न ही वह मारा गया है। ऐसे में परिवार ने गांव छोड़ना ही बेहतर समझा है।
कोटा की प्रधान प्रभा देवी का कहना है कि पीड़ित परिवार ने बच्चों की जान की खातिर अपने पैतृक गांव, घर, खेत खलिहान का मोह छोड़ दिया है। मेहरबान ने बुधवार से गांव का घर खाली करना शुरू कर दिया है। एक दो दिन में वह गांव छोड़ देंगे। ग्रामीणों को उनका गांव छोड़ना बहुत बुरा लग रहा है, लेकिन वे कुछ कर भी नहीं सकते।
ग्राम प्रधान का कहना है कि वन्यजीव इसी तरह जान लेने लगे तो वह दिन दूर नहीं, जब गांव वीरान हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क प्रशासन लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा रहा है। पलायन के फैसले के पीछे वन विभाग और जिला प्रशासन का लचर रवैया भी जिम्मेदार है। गांव में गुलदार को मारने के लिए भेजी गई टीम नदारद है। विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने के बाद चुप्पी साध ली है।
गुलदार की दहशत के कारण परिवार का गांव छोड़ना गंभीर बात है, यह मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मैं आज ही इस सिलसिले में राजाजी पार्क प्रशासन के निदेशक और अन्य अधिकारियों से वार्ता करूंगा। आदमखोर गुलदार को मारने के लिए जरूरत पड़ी तो दूसरे शिकारी भी वहां तैनात किए जाएंगे।
-चंद्रशेखर भट्ट, जिलाधिकारी पौड़ी