वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कालेज/ एचएनबी बेस अस्पताल में कार्यरत संविदा पैरामेडिकल स्टाफ के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच होगी। मेडिकल कालेज प्रशासन संविदा कर्मियों की शैक्षिक योग्यता की जांच कराकर यह पुख्ता करना चाहता है कि कहीं किसी ने जुगाड़ से फर्जी दस्तावेज तो नहीं लगाए हैं।
मालूम हो कि मेडिकल कालेज में वर्ष 2009 से 2011 के बीच संविदा पर काफी संख्या में पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति हुई। तब यह मामला उठा था कि कतिपय अभ्यर्थियों ने फर्जी तरीके से प्रशिक्षण संस्थानों से प्रमाणपत्र हासिल किए हैं। इनकी नियुक्ति में कराने मेें कुछ लोगों का हाथ भी रहा। इसके अलावा आरक्षण में शासनादेश का पालन नहीं किया गया। संविदा में नियुक्ति के लिए उत्तराखंड के मूल/स्थायी निवासियों को आरक्षण का लाभ मिलना था। बावजूद इसके राज्य से बाहर के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दे दिया गया। अब नए प्राचार्य प्रो. सीएम रावत के आने के बाद अब इन रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना बनी है।
आरटीआई कार्यकर्ता कुशलानाथ कहते हैं कि जब उन्होंने इस संबंध में पूर्व में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी, तो गोलमोल जवाब दिया गया। यदि सही तरीके से जांच हुई, तो नियुक्ति में अन्य गड़बडिय़ां भी सामने आएंगी।
कोट-
पैरामेडिकल स्टाफ के प्रमाणपत्रों की प्रतिलिपि इसी हफ्ते संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों में भेज कर सत्यता जानी जाएगी। इससे वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी।- प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कालेज श्रीनगर