लैंसडौन वन प्रभाग के कोल्हूचौड़ गेस्ट हाउस प्रकरण के बाद अब वन विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरना आसान नहीं होगा। वन विभाग ने वन विश्रामगृहों में ठहरने के लिए कड़े मानक बनाए हैं।
जंगल की सैर को आने वाले लोगों और सैलानियों को वन विश्राम भवन को आरक्षित करने के लिए इन मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। इसके बाद ही कोल्हूचौड़, पनियाली, लालढांग, नौडी, सनेेह, चौखम स्थित गेस्ट हाउस में रहने की अनुमति मिल सकती है।
31 दिसंबर की रात को लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित कोल्हूचौड़ वन विश्राम भवन में वन कानूनों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस द्वारा उद्योगपति समीर थापर सहित 16 अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। मामले में उद्योगपति समीर थापर और उसके साथी पौड़ी जेल में बंद है, जबकि लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ मयंक शेखर झा को भी प्रकरण में सस्पेंड कर दिया गया है।
यह हैं गेस्ट हाउस आरक्षण के नए मानक
वन विभाग विश्राम भवन में ठहरने के लिए भ्रमण का उद्देश्य बताना होगा। लोगों की संख्या और सभी की आईडी जमा करानी होगी। आरक्षण के समय आईडी सहित दी गई लोगों की संख्या के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति को विश्राम भवन में जाने की इजाजत नहीं होगी।
वाहनों की संख्या और उनके नंबर पहले बताने होंगे, उन्हें ही जंगल में प्रवेश की इजाजत दी जाएगी। वन कर्मियों द्वारा पूरे वाहनों और उनके सामान की जांच के बाद ही इजाजत दी जाएगी। गेस्ट हाउस में मांसाहारी भोजन पकाने-लाने, परोसने, शराब और हर प्रकार के नशे पर पाबंदी होगी। भवन में केवल शाकाहारी भोजन बनाने और बाहर से लाने की अनुमति दी जाएगी।
वन विश्राम भवन के मार्ग के अलावा अन्य जंगली मार्गों पर वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी। आर्मी और खाकी वर्दी जैसे कपड़े पहनने पर पाबंदी होगी। वन विश्राम परिसर में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र, ज्वलनशील, विस्फोटक पदार्थों पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।
कहते हैं अधिकारी
लैंसडौन वन प्रभाग के वन विश्राम भवन में रहने के लिए आगंतुकों को जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
- एके त्रिपाठी, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग