भाबर के शिवराजपुर गांव के लोगों ने उनके सार्वजनिक तालाब और इससे सटी सरकारी जमीन कब्जाने के प्रयास का विरोध करते हुए सोमवार को यहां तहसील में जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि भूमाफिया के इशारे पर सौ साल पुराने पशुओं के पानी पीने के तालाब में पानी नहीं भरने दिया जा रहा है। ग्रामीणों के विरोध करने पर जनप्रतिनिधियों को धमकी दी जा रही है। ग्रामीणों ने तालाब में पानी की व्यवस्था कराने और सरकारी जमीन पर कब्जे की जांच की मांग प्रशासन से की है। कहा कि इस मामले में कार्रवाई न होने पर ग्रामीण फिर से तहसील में प्रदर्शन करेंगे।
सोमवार को पूर्व जिला पंचायत सदस्य आलोक रावत और ग्राम प्रधान जीना देवी की अगुवाई में शिवराजपुर के ग्रामीण तहसील मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने तहसील में प्रदर्शन के बाद एसडीएम जीआर बिनवाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें गांव के सौ साल पुराने तालाब में पानी भरने से रोकने और करीब पांच बीघा सरकारी जमीन पर कब्जे के प्रयास की बात कही। कहा कि गांव में वर्ष सौ साल से अधिक समय से तालाब मौजूद है। जहां गांव ही नहीं बल्कि पूरे इलाके के पशु गर्मियों में पानी पीते हैं। इसी जमीन पर सिंचाई विभाग का एक ट्यूबवेल भी मौजूद है, जहां से इस तालाब में पानी भरा जाता है। ग्रामीणों ने वर्ष 1952 के उन दस्तावेजों को भी एसडीएम के समक्ष पेश किया, जिसमें वहां पर तालाब होने और कैटल रेस्ट लैंड के प्रमाण मौजूद हैं।
प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों में पूर्व बीडीसी मायारानी, जगदीश कपटियाल, संजीव जखमोला, पीतांबर दत्त कपटियाल, वीरेंद्र बिष्ट, लक्ष्मण बिष्ट, अरविंद लिंगवाल, गिरीश वशिष्ठ, शशिकांत जोशी, सतीश कपटियाल, रमाकांत तिवारी, हरीश चंद्र जोशी और मदनमोहन आदि शामिल थे।