रक्षा बंधन के सात महीने बाद भी भाई की ओर से भेजा गया मनीआर्डर बहन को अब तक नहीं मिला है। पोस्ट आफिस के अधिकारी डुप्लीकेट मनीआर्डर जारी करने के दावे कर रहे हैं। हालांकि अब तक बहन के घर पर पोस्टमैन मनीआर्डर लेकर नहीं पहुंचा।
रिखणीखाल ब्लाक के मंझियाड़ी निवासी सतीश चंद्र ने रक्षाबंधन के बाद आठ सितंबर 2015 को रिखणीखाल ब्लाक के पोस्टआफिस कलिगाड़ से बालावाला देहारादून निवासी अपनी बहन आनंदी देवी धस्माना के लिए राखी का तोहफा खरीदने के लिए 500 रुपये का मनीआर्डर किया था। डाक विभाग की लापरवाही से यह मनीआर्डर बहन को अब तक नहीं मिला है। तब से भाई पांच सौ रुपये के लिए ब्लाक, जिला और देहरादून डाकघर के चक्कर काटकर सैकड़ों रुपये फूंक चुका है। पांच सौ रुपये के मनीआर्डर गुम होने के बारे में डाक विभाग के पास कोई जवाब नहीं है।
सतीश चंद्र ने बताया कि बहन को मनीआर्डर नहीं मिलने पर उन्होंने कलगाड़ पोस्टआफिस से संपर्क किया। जहां से डाक लैंसडौन भेजने की बात कही गई। वह 24 नवंबर को लैंसडौन पोस्टआफिस गया तो वहां से मनीआर्डर तीन दिन में बालावाला पहुंचाने का भरोसा दिलाया गया। मनीआर्डर नहीं पहुंचने पर 11 फरवरी 2016 को जिला मुख्य डाकघर में शिकायत की गई। वहां से उन्हें देहरादून मुख्य डाकघर में शिकायत करने के लिए कहा। 19 मार्च को देहरादून में शिकायत करने पर चीफ पोस्टमास्टर की ओर से भरोसा दिलाने के बाद भी मनीआर्डर का कहीं पता नहीं चला। बताया कि पांच सौ रुपये के मनीआर्डर के लिए वे अब तक हजारों रुपये आने जाने के किराए में फूंक चुके हैं।
उधर, लैंसडौन पोस्टआफिस के पोस्ट इंस्पेक्टर सुशील राज ने बताया कि उन्हें बालावाला के लिए भेजे जाने वाले मनिआर्डर की जानकारी है। मनीआर्डर नहीं पहुंचने पर डुप्लीकेट मनीआर्डर जारी किया गया है।